दुर्ग, 26 अगस्त : मूक-बधिर युवक को लोन दिलाने(Loan Fraud), सिबिल स्कोर बढ़ाने और कमीशन देने का झांसा देकर उसके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सामान अपने पास रखने के बाद आरोपितों ने उसकी किश्तें जमा करना बंद कर दिया और युवक के खाते से रकम कटने लगी।
दुर्ग में तीन लोगों पर धोखाधड़ी का मामला
यह मामला दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र का है। रायपुर के बोरिया खुर्द निवासी मनीष कुमार पांडेय (36) ने शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने लोन धोखाधड़ी (Loan Fraud) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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लोन दिलाने का दिया था झांसा
शिकायत के मुताबिक मनीष और अनुराग दोनों मूक-बधिर हैं। अनुराग का भाई शेखर मनीष का परिचित था। आरोप है कि शेखर और ऋषभ ने मनीष को उसके नाम पर सामान लोन से खरीदने और उसकी किश्तें खुद जमा करने का भरोसा दिया। इसके बदले लोन की रकम में से कुछ हिस्सा देने का लालच भी दिया गया।
आरोपितों ने मनीष के दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल पर आए ओटीपी का इस्तेमाल कर होम क्रेडिट फाइनेंस से करीब 38,500 रुपए का लोन कराया। पुलिस अब पूरे मामले में लोन धोखाधड़ी (Loan Fraud) से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही है।
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तीन दुकानों से खरीदा इलेक्ट्रॉनिक सामान
शिकायत में बताया गया है कि लोन की रकम से अनामिका इलेक्ट्रॉनिक्स दुर्ग, कोमा इलेक्ट्रॉनिक्स सुपेला और रिलायंस डिजिटल सूर्या मॉल से इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा गया। आरोप है कि सामान आरोपितों ने अपने पास रख लिया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, शुरुआत में कुछ किश्तें आरोपितों ने जमा कीं, लेकिन बाद में किश्तें बंद कर दी गईं। इसके बाद फाइनेंस कंपनी ने मनीष से संपर्क किया। उसके बैंक खाते से भी किश्त की राशि कटने लगी।
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शिकायत करने पर धमकी देने का आरोप
मनीष का आरोप है कि जब उसने आरोपितों से किश्तें जमा करने के लिए कहा तो उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। शिकायत करने की बात कहने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर लोन धोखाधड़ी (Loan Fraud) के मामले में तीनों आरोपितों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। पुलिस दस्तावेजों, फाइनेंस रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
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सिबिल स्कोर बढ़ाने के नाम पर ठगी का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार उसे भरोसा दिलाया गया था कि उसके नाम पर सामान फाइनेंस कराने से सिबिल स्कोर बेहतर होगा और इसके बदले उसे कमीशन भी मिलेगा। इसी भरोसे में उसने अपने दस्तावेज और ओटीपी उपलब्ध कराए। बाद में किश्तों का भुगतान बंद होने पर उसे मामले की जानकारी हुई।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसके नाम पर कितने फाइनेंस कराए गए और खरीदा गया सामान कहां गया। मामले में लोन धोखाधड़ी (Loan Fraud) के आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




