सीजी भास्कर 5 दिसम्बर Loan Fraud Scam : नोएडा में करोड़ों रुपये के बैंक लोन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे बैंकों से लोन लेकर फरार होने वाले एक संगठित गैंग को पुलिस ने पकड़ा है। टीम ने गैंग के सरगना समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट कई सालों से सक्रिय था और विभिन्न बैंकों को योजनाबद्ध तरीके से चूना लगाता रहा।
Loan Fraud Scam : 126 पासबुक, 170 ATM कार्ड और ढेर सारे दस्तावेज़ बरामद
छापेमारी में पुलिस को भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज़ मिले, जिनमें 126 पासबुक, 170 डेबिट कार्ड, 45 आधार कार्ड, 27 पैन कार्ड, 15 अन्य आईडी कार्ड, 5 वोटर आईडी, 26 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप और सैकड़ों लोगों के होम तथा पर्सनल लोन से जुड़े कागजात शामिल हैं। बरामद सामान की मात्रा देखकर ही पता चलता है कि गैंग किस स्तर पर काम कर रहा था।
10 बैंकों से 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी का संदेह
जांच में सामने आया है कि गैंग ने कम से कम 10 बैंकों को निशाना बनाया और मिलकर 100 करोड़ रुपये से ऊपर की ठगी को अंजाम दिया। आरोपी फर्जी प्रोफाइल बनाकर विभिन्न नामों से होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य फाइनेंशियल स्कीम्स में पैसा लेते और कुछ ही समय बाद गायब हो जाते थे। अब तक पुलिस को लगभग 200 संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिल चुकी है।
Loan Fraud Scam : चंडीगढ़ से लेकर उत्तराखंड तक फैला था गिरोह का नेटवर्क
जांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला था। आरोपी फर्जी आधार, पैन और पहचान पत्र तैयार कर एक ही व्यक्ति की कई पहचानें बनाते थे। इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर वे लोन मंजूरी के लिए (Loan Profile Setup) तैयार करते और बिल्डरों की मदद से फर्जी फंडिंग दिखाते थे।
टीम अब उन बिल्डरों, प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनसे इनके आर्थिक रिश्ते जुड़े रहे।
क्या बैंक कर्मचारी भी शामिल थे? जांच में शक बढ़ा
पुलिस को संदेह है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने में कुछ बैंक कर्मियों की भी अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। लोन प्रोसेसिंग से जुड़े कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का मानना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इतने बड़े लेवल पर यह खेल संभव नहीं था।
लोन पास होते ही गायब हो जाते थे आरोपी, करोड़ों की रकम घूमती थी प्रॉपर्टी बाजार में
पूछताछ में पता चला कि ठगी गई रकम को यह गैंग कई बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर इन्वेस्ट करता था। कई फर्जी बुकिंग, फर्जी एग्रीमेंट और बनावटी रजिस्ट्री के कागजात भी टीम को मिले हैं। यह नेटवर्क प्रॉपर्टी बाजार में ब्लैक–व्हाइट मिक्स करके मोटा मुनाफा कमाता था।
इंटर-स्टेट जांच की तैयारी, कई और नाम सामने आने की उम्मीद
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए इंटर-स्टेट टीम बनाने की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों को आशंका है कि इस सिंडिकेट से कई और लोग जुड़े हो सकते हैं।
गैंग के खिलाफ सूरजपुर थाने में पहले ही मामला दर्ज हो चुका है और आगे की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।





