सीजी भास्कर, 17 मार्च। अदालतों में चल रहे लंबे विवाद जहां अक्सर रिश्तों को और दूर (Lok Adalat Rajnandgaon) कर देते हैं, वहीं राजनांदगांव में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने कई टूटते परिवारों को फिर से जोड़ने का काम किया। आपसी बातचीत, समझाइश और संवेदनशील पहल के जरिए ऐसे रिश्ते भी बच गए, जिनमें सुलह की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर आयोजित इस लोक अदालत में पति-पत्नी के कई पुराने विवादों का निपटारा किया गया। खास बात यह रही कि यहां पक्षकारों को बिना किसी शुल्क और बिना वकील के सीधे न्यायाधीश के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला, जिससे संवाद का रास्ता आसान हुआ।
जब बातचीत से खत्म हुई दूरियां
लोक अदालत में सामने आए मामलों में एक मामला दुर्गेश्वरी और सुरेश का रहा, जिनका विवाह 2022 में हुआ (Lok Adalat Rajnandgaon) था। पारिवारिक विवाद बढ़ने के बाद दोनों अलग रह रहे थे और मामला कोर्ट तक पहुंच गया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने दोनों को परिवार और भविष्य की जिम्मेदारियों का अहसास कराया। लंबी बातचीत के बाद दोनों ने आपसी सहमति से फिर साथ रहने का फैसला लिया।
इसी तरह चंद्रकुमार और तारामती, जिनकी शादी 2012 में हुई थी, लंबे समय से मतभेदों के कारण अलग थे। लोक अदालत में बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझ बनी और उन्होंने भी अपने रिश्ते को एक और मौका देने का निर्णय लिया।
लोक अदालत: जहां कानून से ज्यादा संवाद काम आता है
लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां फैसले थोपे नहीं जाते, बल्कि आपसी सहमति से समाधान निकाला जाता है। वर्षों तक चलने वाले मामलों का निपटारा कम समय (Lok Adalat Rajnandgaon) में हो जाता है और दोनों पक्षों को मानसिक राहत मिलती है। इस मंच पर न केवल समय और पैसे की बचत होती है, बल्कि रिश्तों को टूटने से बचाने की भी कोशिश की जाती है।
सिर्फ केस निपटाना नहीं, समाज में संतुलन बनाना मकसद
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि लोक अदालत का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि परिवार और समाज में सद्भाव बनाए रखना भी है। लोगों से अपील की गई है कि छोटे-छोटे विवादों को लंबी कानूनी लड़ाई में बदलने के बजाय बातचीत और समझदारी से सुलझाने की कोशिश करें।





