सीजी भास्कर, 11 जनवरी। बस्तर जिले में सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक मड़ई मेला (Madai Mela 2026) इस साल 29 जनवरी गुरुवार से नगर पंचायत बस्तर में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला में आसपास के 84 गांव रायकेरा परगना के देवी देवता और ग्रामीण शामिल होंगे। परंपरा के अनुसार नगर के पुजारीपारा स्थित मां गंगादेई मंदिर से माता की छत्र-डोली, लाट एवं देवी देवता गाजा बाजा के साथ मेला स्थल तक लाया जाएगा। इसमें राज परिवार, जनप्रतिनिधि और नगरवासियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित रहेगी।
नगर पंचायत बस्तर के गंगादेई माता मंदिर परिसर में मेला को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष एवं मेला प्रभारी देवकी भद्रे सहित पार्षदों और वरिष्ठ नागरिकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 29 जनवरी को मड़ई मेला (Madai Mela 2026) आयोजन को लेकर ग्राम पुजारी विशेश्वर यादव ने माता से सहमति ली और इसकी जानकारी उपस्थित नगरवासियों को दी। मेला को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मेला समिति का गठन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से नगर पंचायत अध्यक्ष को मेला प्रभारी बनाया गया।
बैठक में मेला की तैयारी पर विस्तृत चर्चा हुई। सुरक्षा, साफ-सफाई, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेयजल व्यवस्था, साइकिल स्टैंड, पार्किंग, और निगरानी समिति की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही धुरवा नाचा, ओड़िया नाचा एवं देवी देवताओं के निमंत्रण और अन्य आवश्यक तैयारियों का भी समन्वय किया गया। इस प्रकार मड़ई मेला (Madai Mela 2026) को पारंपरिक रूप में सफल बनाने के लिए सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक लखेश्वर कश्यप, ठिरली राम यादव, राजू ठाकुर, उदबोराम नाग, महेश मौर्य, रवि शंकर शुक्ला, अंकित पारख, समीर मिश्रा, वीरसिंह, नरसिंह नागेश, जीतेन्द्र पटेल, सीताराम बघेल, बंशी कश्यप, मंगलराम, कोटवार जानकी राम बघेल सहित बड़ी संख्या में नगरवासी और ग्राम भोंड के ग्रामीण उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता से मेला की पारंपरिक और सांस्कृतिक गरिमा और भी बढ़ गई।
नगर पंचायत अध्यक्ष देवकी भद्रे ने कहा कि मड़ई मेला (Madai Mela 2026) केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने सभी नगरवासियों और ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे इस सांस्कृतिक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और इसे सफल बनाएं।
बस्तर के इस वार्षिक मेला के आयोजन से न केवल धार्मिक व सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ेगी, बल्कि आसपास के गांवों में सामाजिक एकता और स्थानीय पर्यटन को भी बल मिलेगा। नगर पंचायत बस्तर ने इस मेला को सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा इंतजाम पूरे कर लिए हैं।


