सीजी भास्कर, 25 अगस्त : मध्य प्रदेश में पांच वर्ष पूर्व कांग्रेस की कमल नाथ सरकार गिरने की घटना (Madhya Pradesh Congress Government Collapse) को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पांच साल पहले गिरी कमल नाथ सरकार की पृष्ठभूमि पर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अलग-अलग दावे किए हैं, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक पाडकास्ट में कहा कि 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने का कारण विचारधारा का टकराव नहीं था, बल्कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की लगातार उपेक्षा की जा रही थी। दिग्विजय के अनुसार, सिंधिया को लगता था कि उन्हें दरकिनार किया जा रहा है और यही असंतोष सरकार गिरने का कारण बना। इस बयान के जवाब में कमल नाथ ने इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि सच यह है कि सिंधिया को भ्रम था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। कमल नाथ के अनुसार, इस गलतफहमी और निजी महत्वाकांक्षा की वजह से कांग्रेस की सरकार सत्ता से बाहर हुई।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कमल नाथ के नेतृत्व में सत्ता में वापसी की थी। लेकिन यह सरकार केवल 15 महीने ही चल पाई। 2020 में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए, तब कांग्रेस की सरकार गिर गई और भाजपा ने प्रदेश में फिर से सत्ता पर कब्जा कर लिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम को अब (Madhya Pradesh Congress Government Collapse) की मिसाल के रूप में बार-बार याद किया जाता है।
दिग्विजय सिंह और कमल नाथ के बीच की खींचतान कांग्रेस के अंदरूनी हालात को उजागर करती है। दोनों नेताओं के बीच रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं। अब एक बार फिर उनके बयानों ने संगठन के भीतर बहस को हवा दी है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दोनों नेताओं के बीच मतभेदों को कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कमल नाथ और दिग्विजय सिंह का 45 साल का प्रेम है। हमें अतीत को छोड़कर भविष्य की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस कांग्रेस की एकजुटता को कमजोर कर सकती है। 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस के लिए यह आवश्यक है कि पुराने विवादों से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने पर फोकस किया जाए। नहीं तो एक बार फिर पार्टी अंदरूनी कलह का शिकार हो सकती है। मध्य प्रदेश की जनता भी चाहती है कि कांग्रेस इस बार अपने मतभेदों को किनारे रखकर विपक्ष की भूमिका बेहतर ढंग से निभाए। इस तरह (Madhya Pradesh Congress Government Collapse) पर छिड़ी ताजा बहस ने न केवल कांग्रेस बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में नई सुगबुगाहट पैदा कर दी है।