इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए यूपी के 558 मदरसों की जांच (Madrasa Investigation Stay by Allahabad High Court) पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल Economic Offences Wing (EOW) द्वारा की जा रही जांच को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस आदेश के बाद इन मदरसों को अंतरिम राहत मिली है।
सरकार और आयोग से जवाब-तलब
कोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों से चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने साफ किया है कि अगली सुनवाई तक आयोग और सरकार के आदेश लागू नहीं होंगे। इस मामले को 17 नवंबर 2025 को उपयुक्त बेंच के सामने रखा जाएगा।
Madrasa Investigation Stay by Allahabad High Court: आदेश को चुनौती क्यों दी गई?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर National Human Rights Commission (NHRC) द्वारा जारी आदेशों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि 558 सरकारी और अनुदानित मदरसों में की जा रही आपराधिक जांच उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग रखी।
जांच का आधार क्या था?
जांच के पीछे मुख्य वजह illegal funding (गैरकानूनी फंडिंग) और irregular appointments (गड़बड़ नियुक्तियां) बताई गई थी। कोविड-19 काल के दौरान 308 शिक्षकों की भर्ती को लेकर संदेह जताया गया था। साथ ही मदरसे और मस्जिद की जमीन पर दिए गए अनुदान की जांच का भी आदेश दिया गया था।
बढ़ते मदरसे और नियुक्तियों पर सवाल
आरोप लगाया गया कि कोरोना महामारी के बाद प्रदेश में मदरसों की संख्या और नियुक्तियों में अचानक इजाफा हुआ है। यह भी सवाल उठे कि क्या ये नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से हुईं या फिर इसमें किसी तरह की अनियमितता रही। इन्हीं आरोपों की जांच को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।


