सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान अपनी सुंदरता और ग्लैमरस अंदाज से रातों-रात चर्चा में आईं मॉडल हर्षा रिछारिया (Mahakumbh Viral Sadhvi Sanyas) ने आखिरकार पूरी तरह अध्यात्म की राह चुन ली है। रविवार को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उन्होंने औपचारिक रूप से संन्यास ग्रहण कर लिया। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने उन्हें संन्यास दीक्षा दी। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही उनका पिछला जीवन समाप्त हो गया और अब उन्हें नया नाम स्वामी हर्षानंद गिरि दिया गया है।

पिंडदान और श्राद्ध कर्म के साथ पूर्व जीवन का त्याग
संन्यास की प्रक्रिया अत्यंत कठिन और मर्यादित रही। परंपरा के अनुसार, हर्षा को शिखा और दंड त्याग की विधि कराई गई। इसके साथ ही उनका तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी संपन्न कराया गया। सनातन धर्म में यह प्रक्रिया इस बात का प्रतीक है कि व्यक्ति ने अपने सांसारिक मोह-माया और पूर्व जीवन का पूर्णतः त्याग कर दिया है।

संन्यास दीक्षा के बाद महामंडलेश्वर ने उन्हें मर्यादित आचरण की सीख दी। उन्होंने कहा कि एक संन्यासी का आचरण पूरे समाज को प्रभावित करता है, इसलिए विधि-विधान और गरिमा का पालन अनिवार्य है। यह (Mahakumbh Viral Sadhvi Sanyas) घटनाक्रम अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवादों और ट्रोलिंग के बीच बदला फैसला
गौरतलब है कि प्रयागराज के माघ मेले के दौरान हर्षा ने धर्म की राह छोड़ने का संकेत दिया था। उस वक्त उन्होंने अपने ऊपर उठ रहे सवालों और चरित्र हनन की कोशिशों पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि ‘मैं सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूं।’ हालांकि, अब अक्षय तृतीया पर लिए गए इस फैसले ने सबको चौंका दिया है। 4 जनवरी 2025 को जब निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में वह रथ पर बैठी नजर आई थीं, तब से ही वह लगातार सुर्खियों में थीं। मीडिया ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम दिया था, जिसके बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या 17 लाख के पार पहुंच गई थी।

मॉडल से संन्यास तक का सफर
मूलतः उत्तर प्रदेश के झांसी की रहने वाली हर्षा रिछारिया का परिवार भोपाल में रहता है। उनके पिता बस कंडक्टर हैं और मां बुटीक चलाती हैं। अध्यात्म में आने से पहले हर्षा एक सफल स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। उन्होंने अहमदाबाद से योग का विशेष कोर्स भी किया है।

महाकुंभ के दौरान वायरल होते ही उनके इंस्टाग्राम पर एक दिन में 3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बढ़ गए थे। फिलहाल वह निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या के रूप में अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखेंगी। इस (Mahakumbh Viral Sadhvi Sanyas) के बाद अब वह केवल सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर ध्यान केंद्रित करेंगी।



