सीजी भास्कर, 26 मार्च। छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार से जुड़े दो गंभीर मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख (Mahasamund Ropeway Accident) अपनाया है। महासमुंद में हुए रोपवे हादसे और राज्य की जेलों में कैदियों की मौत के मामलों को लेकर आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है।
रोपवे हादसे में एक महिला की मौत और 16 लोगों के घायल होने की घटना को गंभीर मानते हुए आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और महासमुंद के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट में घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की व्यवस्था और मृतक के परिजनों तथा घायलों को दिए गए मुआवजे की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
इसके साथ ही NHRC ने राज्य की जेलों में पिछले चार वर्षों में हुई 285 कैदियों की मौत के मामले को भी गंभीरता (Mahasamund Ropeway Accident) से लिया है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इन मौतों का कारण आत्महत्या और पुरानी बीमारियां बताया गया था, लेकिन आयोग ने इस पर विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई है।
आयोग ने मुख्य सचिव और जेल महानिदेशक से यह भी पूछा है कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की स्थिति क्या है, डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं और इन समस्याओं के समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
इस पूरे मामले ने राज्य की जेल व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े (Mahasamund Ropeway Accident) कर दिए हैं। NHRC की इस कार्रवाई को जवाबदेही तय करने और सिस्टम में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार आयोग को क्या रिपोर्ट सौंपती है और आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।


