सीजी भास्कर, 22 जून। महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्चों के दौर में भरण पोषण से जुड़े मामलों को लेकर अदालतों के सामने नए सवाल (Maintenance Increase) लगातार आ रहे हैं। खासकर तब, जब वर्षों पहले तय की गई राशि वर्तमान जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं रह जाती। ऐसे ही एक मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि समय के साथ बदलती परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मामले में पत्नी ने बढ़ती महंगाई और बच्चे की पढ़ाई पर होने वाले खर्च का हवाला देते हुए भरण पोषण राशि बढ़ाने की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए यह देखा कि वर्षों पहले तय हुई राशि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप है या नहीं।
बिलासपुर हाई कोर्ट ने पत्नी और बच्चे के लिए बढ़ाई गई भरण पोषण राशि को उचित ठहराते हुए पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि महंगाई, जीवन यापन की बढ़ती लागत और बच्चों की शिक्षा पर बढ़ रहे खर्च ऐसे कारक हैं, जिनके आधार पर गुजारा भत्ता की राशि में वृद्धि की जा सकती है, भले ही पहले लोक अदालत में किसी राशि पर समझौता हुआ हो।
वर्ष 2001 में हुआ था विवाह Maintenance Increase
मामले के अनुसार जांजगीर चांपा जिले के निवासी संतोष कुमार बरेठ का विवाह वर्ष 2001 में मालती बरेठ के साथ हुआ था। वैवाहिक जीवन के लगभग 13 वर्ष बाद दोनों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ और पति अलग रहने लगा।
लोक अदालत में हुआ था समझौता
पत्नी ने वर्ष 2016 में भरण पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। बाद में लोक अदालत में हुए समझौते के दौरान पति ने 3 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण राशि देने पर सहमति व्यक्त की थी।
बाद में बढ़ोतरी की मांग
पत्नी ने बाद में अदालत में आवेदन देकर भरण पोषण राशि बढ़ाने की मांग की। आवेदन में कहा गया कि समय के साथ खर्चों में वृद्धि हो चुकी है और बच्चे की शिक्षा सहित अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो रहा है।
परिवार न्यायालय ने बढ़ाई राशि
मामले की सुनवाई के बाद जांजगीर स्थित परिवार न्यायालय ने भरण पोषण राशि बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह (Maintenance Increase) कर दी थी। इस आदेश को पति ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने माना परिस्थितियां बदलीं
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने कहा कि पहले हुए समझौते के बाद परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। महंगाई बढ़ी है, जीवन यापन का खर्च बढ़ा है और बच्चे की शिक्षा पर भी अधिक खर्च हो रहा है। ऐसे में राशि बढ़ाने का आदेश न्यायसंगत है।
आय संबंधी प्रमाण नहीं दे सका पति
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पति अपनी आय के संबंध में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पहलू को भी न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना।
याचिका हुई खारिज
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही ठहराया और पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज (Maintenance Increase) कर दी। अदालत ने माना कि बदली हुई परिस्थितियों में भरण पोषण राशि बढ़ाया जाना उचित है।





