सीजी भास्कर, 5 जनवरी। मैनपुर में मक्का की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी को लेकर किसानों और जिला प्रशासन के बीच सोमवार को लंबी और गहन बैठक हुई। बैठक में किसान संघर्ष समिति ने एक बार फिर समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी (Maize Farmers Protest Gariaband) की मांग दोहराई,
लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में प्रशासन इस मांग को पूरा करने में असमर्थ नजर आया। हालांकि, किसानों को आंशिक राहत देने के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत पंजीकृत प्रत्येक किसान को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ आय सहायता देने पर सहमति बन गई।
बैठक में कलेक्टर भगवान सिंह यूईक, पुलिस अधीक्षक वेद व्रत सिरमौर्य और जिला कृषि अधिकारी चंदन राय मौजूद रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
नाफेड खरीदी न होने की बताई वजह
कलेक्टर ने किसानों को बताया कि पिछले वर्ष एथेनॉल डिस्टलरी की मांग के चलते नाफेड द्वारा 2100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मक्का खरीदी (Maize Farmers Protest Gariaband) की गई थी। इस वर्ष मांग नहीं होने के कारण नाफेड द्वारा MSP पर खरीदी संभव नहीं है, जिससे प्रशासन के पास भी सीमित विकल्प रह गए हैं।
धान खरीदी से वंचित न हों किसान, प्रशासन का आश्वासन
बैठक में किसानों ने यह मुद्दा भी उठाया कि वन भूमि से जुड़े कई किसानों की गिरदावरी रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज नहीं होने के कारण वे धान खरीदी से वंचित हो सकते हैं। इस पर जिला कृषि अधिकारी चंदन राय ने जानकारी दी कि समिति मॉड्यूल पर धान खरीदी पोर्टल में पंजीयन से वंचित किसानों का पंजीयन 7 जनवरी तक जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर तिथि आगे बढ़ाने के लिए कलेक्टर स्तर से प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि कोई भी किसान खरीदी प्रक्रिया से बाहर न रहे।
चक्का जाम स्थगित, प्रशासन को राहत
बैठक के बाद किसान संघर्ष समिति ने 6 जनवरी को प्रस्तावित नेशनल हाइवे चक्का जाम को स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद जिला प्रशासन ने राहत (Maize Farmers Protest Gariaband) की सांस ली और संवाद की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही।
जिले में मक्का उत्पादन की स्थिति
जिले में करीब 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 8 हजार से अधिक किसान मक्का की खेती कर रहे हैं। पिछले वर्ष नाफेड द्वारा MSP पर खरीदी होने से किसानों को अच्छी आमदनी मिली थी, जिसके चलते इस साल मक्का के रकबे में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
लेकिन इस बार MSP पर खरीदी नहीं होने से किसान 1400–1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर मक्का बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही थी। इसी कारण किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। प्रशासन और किसानों के बीच हुई इस बैठक को फिलहाल टकराव की जगह संवाद की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।


