सीजी भास्कर,12 october देश की पहली महिला मेजर जनरल (Major General Mukti Sharma): एक नई राह की शुरुआत
भारतीय सेना में डॉक्टर से लेकर कमांडिंग ऑफिसर तक की यात्रा आसान नहीं थी। लेकिन Major General Mukti Sharma ने साबित किया कि यूनिफॉर्म पहनने का मतलब केवल वर्दी नहीं, बल्कि उस वर्दी का वजन उठाने की ताकत भी है।
वो भारत की पहली महिला बनीं जिन्होंने वेस्टर्न कमांड हॉस्पिटल की कमान संभाली — और इसी के साथ भारतीय सेना में महिला नेतृत्व की नई कहानी लिखी।
एक बेटे का डर, एक मां का साहस
जब उन्हें ब्रिगेडियर बनाया गया, उस वक्त उनके बेटे गौरव ने सबसे पहला सवाल किया – “अब घर में भी गोलियां चलेंगी क्या?”
यह मासूम सवाल बताता है कि सेना में सेवा (Army Life) सिर्फ सैनिकों के लिए नहीं, उनके परिवारों के लिए भी परीक्षा होती है।
मुक्ति शर्मा ने बताया कि “ड्यूटी पर जाना जितना कठिन था, घर लौटकर बेटे के डर को मिटाना उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल था।”
पिता की मौत ने बदली ज़िंदगी की दिशा
मुक्ति शर्मा के पिता IPS Officer थे। अचानक हुए Heart Attack से उनकी मृत्यु ने उनकी ज़िंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी।
उस पल उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी और की जान नहीं जाने देंगी। यहीं से शुरू हुआ डॉक्टर बनने का सफर।
उन्होंने Armed Forces Medical College (AFMC, Pune) से शिक्षा ली और फिर सेना में शामिल होकर न सिर्फ जवानों का इलाज किया, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक सहारा दिया।
सेना में शादी, बच्चे और ड्यूटी – सब साथ
सेना में ही उनकी शादी एक आर्मी डॉक्टर से हुई। जुड़वां बेटे – Varun और Gaurav – के साथ ज़िंदगी कभी आसान नहीं रही।
पोस्टिंग बदलने के साथ हर बार उन्हें नए शहर, नई यूनिट और नई जिम्मेदारियां मिलीं।
कई बार ऐसा हुआ कि उन्हें uniform में ही बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा, और फिर वहीं से हॉस्पिटल ड्यूटी जॉइन करनी पड़ी।
कारगिल युद्ध के दौरान – ड्यूटी नहीं, इमोशन था
कारगिल की लड़ाई के दौरान उनका अस्पताल घायल जवानों से भर गया था।
हर दिन नए सैनिक, नई कहानी, और उनके पीछे रोता हुआ परिवार।
मुक्ति शर्मा ने कहा था — “जवानों के जख्मों से ज़्यादा गहरे घाव उनके परिवारों के दिलों में होते हैं।”
इस दौरान उन्होंने न केवल इलाज किया, बल्कि परिवारों के साथ बैठकर उन्हें हिम्मत दी, उम्मीद दी।
महिलाओं के लिए भी बनाई नई मिसाल
एक वाकया उन्होंने साझा किया — एक युवती की शादी उसके देवर से ज़बरदस्ती कराई जा रही थी।
मुक्ति शर्मा ने उस परिवार से बात की, समझाया, और उस लड़की को न्याय दिलाया।
उन्होंने सेना में हुई sexual harassment case की जांच भी पूरी ईमानदारी से की, और उस वक्त के जनरल Bipin Rawat का समर्थन याद किया, जिन्होंने उन्हें सच के साथ खड़े रहने की ताकत दी।
Major General Mukti Sharma: साहस, सेवा और संवेदना का संगम
उनकी कहानी सिर्फ एक महिला अधिकारी की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जिसने Duty और Humanity दोनों को साथ लेकर चला।
सेना में रहकर उन्होंने ये सिखाया कि Command करने के लिए दिल का मजबूत होना जरूरी है, आवाज़ ऊंची होने की नहीं।


