Makar Sankranti Cockfight : तेलुगु भाषी इलाकों में मकर संक्रांति नजदीक आते ही गोदावरी क्षेत्र में पारंपरिक मुर्गा लड़ाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। गांव-कस्बों में अभ्यास स्थल तैयार किए जा रहे हैं और मुकाबलों की तारीखों को लेकर अंदरूनी स्तर पर चर्चा चल रही है।
राज्यों की सीमाएं पार कर जुटती है भीड़
इन आयोजनों को देखने आंध्र प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। मुकाबले केवल अखाड़े तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आसपास के इलाकों में गतिविधियां फैल जाती हैं—जहां दर्शक, आयोजक और सट्टेबाज अलग-अलग स्तर पर सक्रिय रहते हैं।
मुर्गों की खास ट्रेनिंग और सख्त डाइट
प्रतियोगिता के लिए चुने गए मुर्गों को महीनों पहले से तैयार किया जाता है। काजू-बादाम, अंडे, हरी सब्जियां और मांस जैसी डाइट दी जाती है। सुबह-शाम व्यायाम, नियमित देखभाल और कुछ जगहों पर पानी में अभ्यास—ताकि ताकत और फुर्ती दोनों बनी रहे।
नस्ल की कीमतें छू रहीं ऊंचाई
अच्छी नस्ल के चूजों की मांग इतनी बढ़ गई है कि बाजार में कीमतें चौंकाने वाली हैं। जानकारों के मुताबिक एक मजबूत नस्ल के चूजे के लिए हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक चुकाए जा रहे हैं—क्योंकि जीत का भरोसा यहीं से शुरू माना जाता है।
करोड़ों के सट्टे की चर्चाएं तेज
(Illegal Betting India)
मुकाबलों के साथ-साथ सट्टेबाजी की चर्चा भी जोरों पर है। अंदरूनी नेटवर्क के जरिए दांव तय होते हैं और रकम तेजी से बदलती रहती है। यही कारण है कि आयोजनों को लेकर प्रशासन की नजर भी लगातार बनी हुई है।
परंपरा बनाम कानून, बढ़ता तनाव
मकर संक्रांति करीब आते-आते गोदावरी इलाके में यह गतिविधि चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर इसे परंपरा का नाम दिया जाता है, तो दूसरी ओर इसके कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर सवाल उठते हैं—जिससे आने वाले दिनों में सख्ती की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।





