सीजी भास्कर, 16 जनवरी। इलाके में अचानक बदले हालात ने लोगों का ध्यान खींच (Manendragarh Chirmiri Road Project) लिया है। ज़मीन से जुड़े लेन-देन पर रोक, प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी और एक बड़ी परियोजना की आहट—इन सबके पीछे एक ऐसा काम है, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
जिले में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में मनेन्द्रगढ़ (चैनपुर) से चिरमिरी (साजापहाड़) तक 17.40 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण और उन्नयन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस प्रस्तावित परियोजना में सड़क के साथ-साथ आवश्यक पुल-पुलियों के निर्माण को भी शामिल किया गया है, जिससे आवागमन पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम हो सके।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस सड़क परियोजना को लेकर 02 जनवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी द्वारा विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया (Manendragarh Chirmiri Road Project) गया था, जिसे जिला प्रशासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। परियोजना के लिए तहसील मनेन्द्रगढ़ के ग्राम मेण्ड्राडोल, परसगढ़ी और चैनपुर की भूमि प्रस्तावित की गई है।
भूमि अधिग्रहण से पहले सख्ती
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने प्रस्तावित खसरा नंबरों की जमीन पर खरीद-बिक्री, नामांतरण, खाता विभाजन और व्यपवर्तन जैसी गतिविधियों पर आगामी आदेश तक अस्थायी रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी भी कानूनी या तकनीकी अड़चन से बचने के लिए उठाया गया है।
सामाजिक प्रभाव का होगा आकलन
इसी क्रम में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा 14 जनवरी 2026 को सामाजिक प्रभाव आंकलन (Social Impact Assessment) के लिए विशेष दल का गठन (Manendragarh Chirmiri Road Project) किया गया है। यह दल प्रभावित गांवों में जाकर भूमि, परिवारों और आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विस्तृत सर्वे करेगा।
प्रशासन ने भूमि स्वामियों, कृषकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण के दौरान सही जानकारी देकर सहयोग करें, ताकि प्रतिकर, पुनर्वास और सहायता से जुड़ी प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से पूरी की जा सके।
जिला प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि संपूर्ण भूमि अधिग्रहण भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी के बीच आवागमन आसान होने के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।


