गरियाबंद-आशुतोष सिंह : Maoist Arms Cache की सटीक सूचना के बाद पहाड़ी इलाक़े में केंद्रित तलाशी अभियान चलाया गया। दुर्गम रास्तों, झाड़ियों और पथरीले ढलानों के बीच चिन्हित स्थानों पर छिपाकर रखे गए हथियारों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया, जिससे क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात की आशंका टल गई।
इंटेलिजेंस इनपुट से तय हुआ सर्च-प्लान
(Maoist Arms Cache) तक पहुंचने के लिए मिले इनपुट को क्रॉस-वेरिफाई कर टीमों ने संभावित डम्प-पॉइंट मैप किए। समन्वित मूवमेंट, सेक्टर-वाइज घेराबंदी और ग्रिड-पैटर्न में सर्च के जरिए इलाके की सूक्ष्म जांच की गई, ताकि कोई अवशेष पीछे न रह जाए।
(Maoist Arms Cache) से बरामद सामग्री में दो एसएलआर, एक इंसास, एक 12-बोर हथियार के साथ मैगज़ीन और ज़िंदा कारतूस शामिल हैं। सभी वस्तुओं को मौके पर सुरक्षित पैकिंग के बाद प्रोटोकॉल के तहत सील कर फॉरेंसिक-लॉजिस्टिक चैनल में भेजा गया।
इलाके में संभावित हिंसा पर ब्रेक
(Maoist Arms Cache) की बरामदगी से पहाड़ी पट्टी में संभावित हिंसक घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है। स्थानीय बस्तियों के आसपास गश्त बढ़ाई गई है, संवेदनशील पगडंडियों पर निगरानी मजबूत की गई, और ग्रामीणों को किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साझा करने का भरोसा दिया गया।

अभियान की निरंतरता और आगे की रणनीति
प्रकरण के बाद डम्प-पैटर्न की मैपिंग, सप्लाई-रूट ट्रैकिंग और संभावित सेफ-हाउस की पहचान पर काम तेज किया गया है। आने वाले दिनों में इलाके में दोबारा सर्च-स्वीप, एरिया डोमिनेशन और कम्युनिटी इंटरेक्शन कार्यक्रम जारी रहेंगे।






