Maoist Surrender Bijapur : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। शासन की जन-केंद्रित पहल और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम सहित कुल 12 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह घटनाक्रम नक्सल प्रभावित इलाकों में बदलते माहौल का संकेत माना जा रहा है।
महिला माओवादियों की संख्या अधिक
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 8 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं। सभी लंबे समय से सक्रिय थे और संगठन के अलग-अलग दस्ता एवं संरचनात्मक नेटवर्क से जुड़े रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
AK-47 और SLR राइफल पुलिस के हवाले
सरेंडर के दौरान माओवादियों ने अपने पास मौजूद हथियार भी सौंपे, जिनमें एक AK-47 और दो SLR राइफल शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ये सभी माओवादी फायरिंग, आईईडी विस्फोट, आगजनी और दहशत फैलाने जैसी कई गंभीर घटनाओं में शामिल रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण
यह आत्मसमर्पण उच्चस्तरीय सुरक्षा अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया और कहा कि क्षेत्र में लगातार दबाव और संवाद की रणनीति असर दिखा रही है।
पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता
सरकार की पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक माओवादी को तत्काल सहायता के रूप में 50-50 हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही आगे भी प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
2026 में अब तक सैकड़ों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वर्ष 2026 में अब तक 888 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 1163 को गिरफ्तार किया गया। अलग-अलग मुठभेड़ों में 231 माओवादी मारे जा चुके हैं। यह आंकड़े नक्सल नेटवर्क के कमजोर पड़ने की ओर इशारा करते हैं।
मुख्यधारा की ओर लौट रहे लोग
बस्तर क्षेत्र में चल रही योजनाओं और पुनर्वास प्रयासों को लेकर अधिकारियों का कहना है कि लगातार माओवादी संगठन छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की राह चुन रहे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में क्षेत्र की शांति और विकास के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।




