पहली नजर में यह सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा लग सकता है, लेकिन जब परतें खुलती हैं तो साफ होता है कि इसके पीछे भरोसा, व्यवस्था और किसानों की भागीदारी की बड़ी कहानी छिपी है। खरीफ सीजन में जो हुआ, उसने पुराने सारे रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले ने धान खरीदी के मामले में नया इतिहास रच दिया है। 17 नवंबर 2025 से अब तक जिले में कुल 6,77,859.40 क्विंटल धान का उपार्जन दर्ज (MCB District Paddy Purchase) किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। खास बात यह रही कि पूरी खरीदी मोटा धान श्रेणी में हुई, जबकि पतला और सरना धान की खरीदी शून्य रही।
जिले के 25 धान उपार्जन केंद्रों पर किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। केल्हारी, जनकपुर, माड़ीसरई, कोड़ा, कुँवारपुर, सिंगरौली, कौड़ीमार और खड़गवां जैसे केंद्रों पर हजारों क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई। इसके अलावा कछोड़, कमर्जी, कटकोना, कोटाडोल, रापा, बरदर, रतनपुर, सिंगहत, कंजिया, घुटरा, कठौतिया, चैनपुर, बंजी, बहरासी, डोडकी, नागपुर और बरबसपुर जैसे केंद्रों ने भी खरीदी के कुल आंकड़े को मजबूती दी।
व्यवस्था बनी भरोसे की वजह
इस रिकॉर्ड सफलता के पीछे टोकन आधारित व्यवस्था, डिजिटल तौल कांटा, फोटो सत्यापन, रियल-टाइम डेटा एंट्री और समयबद्ध खरीदी प्रक्रिया की अहम भूमिका (MCB District Paddy Purchase) रही। तकनीक आधारित इस सिस्टम ने किसानों की पुरानी शिकायतों को काफी हद तक खत्म किया और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया।
प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य ने किसानों को आर्थिक रूप से संबल दिया। धान की पूरी राशि का सीधा भुगतान बैंक खातों में होने से लेन-देन को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ।
कुल मिलाकर खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 एमसीबी जिले के किसानों के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि विश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक बनकर सामने (MCB District Paddy Purchase) आया है। जिस तरह यह व्यवस्था जमीन पर उतरी है, वह आने वाले वर्षों के लिए एक मॉडल सिस्टम के रूप में देखी जा रही है।


