सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डीविजन बेंच (Division Bench) ने स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि रविवार के दिन प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज की सुविधा (Medical Facility) क्यों नहीं मिल रही है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने शपथ पत्र के साथ इस मामले में स्पष्ट जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की कि अवकाश के दिनों में चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई जा रही है या नहीं और अस्पतालों का संचालन कैसे किया जा रहा है।
जनहित याचिका पर सुनवाई
हाई कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों के स्वत: संज्ञान में लेकर इस मुद्दे को जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के रूप में सुना। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान हैरानी जताई कि भारी-भरकम प्रशासनिक अमला होने के बावजूद अवकाश के दिनों में सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) में जरूरतमंदों को इमरजेंसी और सामान्य इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को शपथ पत्र के साथ सिस्टम संचालन (Hospital System Operations) की पूरी जानकारी देने के आदेश दिए।
प्रमुख शहरों में बदहाली
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में संचालित सरकारी अस्पतालों में रविवार को मरीजों को चिकित्सा सुविधा (Medical Treatment) नहीं मिल रही। राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा और ग्रामीण क्षेत्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हालात और भी खराब हैं। ग्रामीण इलाकों में सामान्य दिनों में भी आवश्यक चिकित्सा सुविधा अक्सर अनुपलब्ध पाई गई।
मरीजों को हो रही असुविधा
बिलासपुर जिले के तखतपुर सीएचसी (Takhatpur CHC) में फ्रैक्चर मरीज को एक्स-रे (X-Ray) के बिना पेनकिलर देकर घर भेजा गया। बिल्हा सीएचसी में मशीनें मौजूद थीं, लेकिन तकनीशियन न होने के कारण ईसीजी (ECG) और एक्स-रे नहीं हो सके। कोरबा जिले के कनकी एसएचसी (Kanki SHC) में अस्पताल पूरी तरह बंद मिला, जहां इमरजेंसी के लिए संपर्क नंबर तक उपलब्ध नहीं था।
जांजगीर जिला अस्पताल में भी हालात अच्छे नहीं थे। इमरजेंसी में केवल एक महिला डॉक्टर मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि रविवार को एक्स-रे और सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिलती, इसलिए मरीजों को केवल पेनकिलर की सलाह दी गई।
मस्तूरी सीएचसी में डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन चेस्ट पेन की शिकायत पर ईसीजी और एक्स-रे कराने से इनकार किया गया। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई। रायपुर और दुर्ग के स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली।
हाई कोर्ट की चेतावनी
डीविजन बेंच ने स्वास्थ्य सचिव से शपथ पत्र के साथ स्पष्ट जवाब मांगा कि अस्पतालों में अवकाश और आपातकालीन दिनों में संचालन का क्या सिस्टम है। कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन की यह लापरवाही गंभीर है और इसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।






