सीजी भास्कर, 12 जनवरी। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के ‘प्रतिशोध’ वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया (Mehbooba Mufti statement) दी है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने उच्च पद पर बैठे अधिकारी नफरत और बदले की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
‘21वीं सदी में बदले की बात सही नहीं’
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जिन लोगों की जिम्मेदारी देश को नापाक मंसूबों से बचाने की है, उनसे इस तरह की बयानबाजी की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इतिहास के नाम पर प्रतिशोध की बात करना समाज के लिए खतरनाक हो सकता है।
युवाओं के उकसावे का जताया डर
पीडीपी प्रमुख ने आशंका जताई कि इस तरह के बयान गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को उकसा सकते हैं, जिससे एक ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय निशाने (Mehbooba Mufti statement) पर आ सकता है, जो पहले से ही कई मुश्किलों का सामना कर रहा है।
डोभाल ने क्या कहा था
दरअसल, शनिवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन कार्यक्रम में NSA अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए ‘प्रतिशोध’ शब्द का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि सपने जीवन को दिशा देते हैं और उन्हें निर्णय में बदलने से सफलता मिलती है।
इतिहास से सबक लेने की बात
डोभाल ने अपने संबोधन में कहा था कि भारत हमेशा इतना स्वतंत्र नहीं था जितना आज है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने संघर्ष, बलिदान और अपमान सहकर यह आजादी हासिल (Mehbooba Mufti statement ) की। उन्होंने कहा कि ‘प्रतिशोध’ शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन अपने आप में एक बड़ी ताकत है।
‘इतिहास भूलना सबसे बड़ी त्रासदी’
NSA डोभाल ने कहा था कि अगर आने वाली पीढ़ियां इतिहास से मिले सबक को भूल गईं, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता कभी आक्रामक नहीं रही, लेकिन अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज करने की कीमत देश को चुकानी पड़ी।


