सीजी भास्कर, 05 जनवरी। ग्रामीण अंचलों में किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आजीविका डबरी योजना अहम भूमिका (MGNREGA Bijapur Farmers) निभा रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले में डबरी निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सिंचाई, जल संरक्षण और वैकल्पिक आजीविका के अवसर तेजी से बढ़े हैं।
हजार डबरियों का लक्ष्य, 431 को मिली मंजूरी
जिला प्रशासन ने बीजापुर में लगभग 1000 आजीविका डबरियों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से 431 आजीविका डबरियाँ स्वीकृत की जा चुकी हैं। इन संरचनाओं से खेती के साथ-साथ भू-जल संवर्धन को भी मजबूती मिल रही है।
सिंचाई से आगे बढ़कर आय का जरिया
आजीविका डबरी अब केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रह गई है। किसान इन डबरियों का उपयोग बागवानी, सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में कर रहे हैं, जिससे उनकी नियमित आय में उल्लेखनीय इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
मेहनत से बनी मिसाल: रैनधर राणा
बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत गंगालूर के किसान रैनधर राणा ने आजीविका डबरी का बेहतर उपयोग कर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी डबरी में मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें करीब 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी 1 एकड़ कृषि भूमि में लगभग 25 मिश्रित फलदार पौधे लगाए ((MGNREGA Bijapur Farmers)) हैं, जिनमें आम और अमरूद प्रमुख हैं। आने वाले वर्षों में इससे उनकी आमदनी और बढ़ने की संभावना है।
तकनीकी मार्गदर्शन से मिली सफलता
तकनीकी सहायक तोरण लाल उर्वशा ने बताया कि रैनधर राणा ने वर्ष 2021-22 में 1 लाख 60 हजार रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण कराया था। डबरी का आकार 20 मीटर × 20 मीटर × 2.5 मीटर है। वर्तमान में मत्स्य पालन और आजीविका जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 3 मीटर गहराई की डबरियाँ बनाई जा रही हैं।
रोजगार सृजन का भी साधन
रोजगार सहायक प्रताप सेमल के अनुसार, डबरी निर्माण कार्य के दौरान करीब 800 मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम मिला और पलायन पर रोक ((MGNREGA Bijapur Farmers)) लगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल
नरेगा के तहत निर्मित आजीविका डबरियाँ किसानों को आर्थिक मजबूती, जल संरक्षण और सतत कृषि की ओर ले जा रही हैं। यह योजना साबित कर रही है कि सही योजना और मेहनत के जरिए छोटे किसान भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
आज बीजापुर जिले में आजीविका डबरी न केवल पानी का स्रोत है, बल्कि ग्रामीण किसानों के लिए आय, रोजगार और आत्मविश्वास की नई राह भी बन चुकी है।


