सीजी भास्कर 30 जनवरी MGNREGA Save Movement Raipur : रायपुर में शुक्रवार को कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट और किसानों की अनदेखी को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
ग्रामीण रोजगार कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा जैसी योजना धीरे-धीरे कमजोर की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान कहा गया कि ग्रामीण मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी नहीं मिल पा रही, जिससे गांवों में आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
प्रमोद दुबे ने उठाया खर्च का मुद्दा
कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे ने कहा कि पहले मनरेगा में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ज्यादा और राज्य सरकार की कम थी, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार को उठाना होगा। उनके अनुसार यह बदलाव गरीब और पिछड़े राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है।
नाम बदलने पर नहीं, अधिकार छीनने पर आपत्ति
प्रमोद दुबे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को योजना के नाम बदलने से आपत्ति नहीं है, लेकिन मनरेगा जैसी अधिकार आधारित योजना को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार नहीं, बल्कि ग्रामीण सम्मान से जुड़ा सवाल है।
किसानों के हक की लड़ाई जारी
पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि कांग्रेस किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। उनका कहना था कि जब तक किसानों और श्रमिकों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक कांग्रेस का आंदोलन थमने वाला नहीं है।
धान खरीदी को लेकर नाराजगी
कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने किसानों से धान खरीदी का वादा तो किया, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई किसानों को अब तक टोकन नहीं मिले हैं, वहीं अनेक किसानों को धान का पूरा भुगतान भी नहीं हुआ है।
खरीदी अवधि बढ़ाने की मांग
कांग्रेस की मांग है कि धान खरीदी की अवधि कम से कम एक महीने तक बढ़ाई जाए। नेताओं का कहना है कि इससे सभी किसान अपनी उपज सरकारी समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे और उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी।
आंदोलन के और तेज होने के संकेत
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए कि यदि सरकार ने मनरेगा और धान खरीदी को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।




