सीजी भास्कर, 24 मार्च। बदलते मौसम और पोषण की बढ़ती जरूरतों के बीच अब बस्तर के किसानों को भी नई दिशा मिल रही है। ग्राम टाकरागुड़ा में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को मिलेट्स यानी लघु धान्य की आधुनिक खेती के गुर सिखाए। यह पहल न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने, बल्कि किसानों की आमदनी और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
खेत से थाली तक – मिलेट्स की बढ़ती अहमियत
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि मिलेट्स जैसे कोदो, कुटकी, रागी और ज्वार न सिर्फ कम पानी में उगते हैं, बल्कि पोषण से भी भरपूर होते हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य में ये फसलें किसानों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही हैं।
वैज्ञानिकों ने दिए आधुनिक खेती के टिप्स
प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञों ने किसानों को जानकारी दी:
उन्नत किस्मों का चयन और बीज गुणवत्ता
कीट एवं रोग प्रबंधन के आसान तरीके
मृदा उर्वरता बढ़ाने की तकनीक
बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक पद्धतियां
किसानों को यह भी बताया गया कि सही तकनीक अपनाकर कम लागत में ज्यादा उत्पादन संभव है।
महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर
कार्यक्रम में महिला कृषकों से विशेष संवाद किया गया। उनकी समस्याओं को सुना गया और खेती में उनकी भूमिका को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि महिला किसानों की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
योजनाओं और रिसर्च से जोड़ने की कोशिश
किसानों को सरकारी योजनाओं और चल रहे अनुसंधान कार्यों से भी अवगत कराया गया, ताकि वे नई तकनीकों और संसाधनों का लाभ उठा सकें। यह प्रशिक्षण केवल जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को व्यवहारिक रूप से नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित भी किया गया।
बस्तर में खेती का बदलता चेहरा
इस तरह के कार्यक्रमों से साफ संकेत मिल रहा है कि अब बस्तर में पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीकों को भी अपनाया जा रहा है। मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देकर क्षेत्र में न केवल पोषण स्तर सुधरेगा, बल्कि किसानों की आय में भी स्थिरता आएगी।


