सीजी भास्कर, 26 नवंबर। दुर्ग जिले के विकासखण्ड धमधा के ग्राम पंचायत लिटिया की वर्षों से पड़ी बंजर भूमि अब पूरी तरह हरियाली में बदल चुकी है। यह परिवर्तन महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत अपनाई गई विशेष (MNREGA Plantation) ट्रेंच वृक्षारोपण तकनीक से संभव हुआ, जिसने ग्राम की सूखी और अनुपयोगी जमीन को नया जीवन प्रदान किया है।
ग्रामसभा के प्रस्ताव पर लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर 1400 पौधों का रोपण किया गया, जिनमें नीम, आँवला और बादाम शामिल हैं। पहले यह भूमि असमान सतह, मिट्टी कटाव, तेज वर्षा जल प्रवाह और अवैध कब्जे के जोखिम के कारण अनुपयोगी थी। सामान्य वृक्षारोपण में पौधे जीवित भी नहीं रह पाते थे, इसलिए ट्रेंच तकनीक को अपनाया गया।
इस तकनीक में प्रत्येक पौधे के पास गहरी और चौड़ी खाइयाँ बनाकर वर्षा जल को रोकने, मिट्टी की नमी बनाए रखने और जड़ों को मजबूत बनाने की व्यवस्था की जाती है। (Trench Technique) परिणामस्वरूप भूमि की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ, पौधों की जड़ें गहराई तक विकसित हुईं और वे गर्मी में भी सुरक्षित रहे। साथ ही मिट्टी कटाव पूरी तरह रुका और ग्राम में भू-जल स्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई।
ग्राम पंचायत की सरपंच पांचो बाई बंजारे और सचिव मिथलेश यादव के मार्गदर्शन में पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, सुरक्षा और निगरानी की मजबूत व्यवस्था की गई। (Green Village Project) 15वें वित्त आयोग से प्राप्त 50 हजार रुपये से पंपलाइन और सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया गया। मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों की सहभागिता ने इसे सामुदायिक परियोजना का रूप दिया, जिससे न केवल भूमि सुरक्षित हुई, बल्कि गांव की जैव-विविधता में भी वृद्धि हुई।
MNREGA Plantation रोजगार का उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा
ग्रामीणों ने बताया कि वृक्षारोपण (MNREGA Plantation) से गांव में हरियाली बढ़ी है और पशु–पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास भी विकसित हो रहा है। परियोजना के तहत 1400 पौधे लगाए गए, 2304 मानव दिवसों का सृजन हुआ, ₹10,18,187 मजदूरी व्यय और ₹4,67,996 सामग्री खर्च हुआ। कुल 426 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। ट्रेंच तकनीक से किया गया यह वृक्षारोपण कार्य पर्यावरण संरक्षण, भूमि सुधार, जल संचयन और स्थानीय रोजगार का उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा है। ग्राम पंचायत लिटिया ने बंजर भूमि को हरियाली में बदलकर मनरेगा की प्रभावशीलता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।


