सीजी भास्कर, 09 जनवरी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अब केवल दिहाड़ी मजदूरी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर जीवन की ठोस बुनियाद (MNREGA Scheme India) भी रख रही है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजना में ऐसा ही एक उदाहरण सामने आया है, जहां मनरेगा के तहत हुए वृक्षारोपण कार्य ने बंजर पड़ी भूमि को हरियाली में बदल दिया।
इस बदलाव की केंद्रबिंदु बनीं स्व-सहायता समूह से जुड़ीं हितग्राही कस्तूरी, जिन्होंने न सिर्फ योजना का लाभ लिया, बल्कि इसे गांव के लिए एक प्रेरक मॉडल में भी बदल दिया।
रोज़गार के साथ पर्यावरण का संरक्षण
मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार उपलब्ध कराना, पर्यावरण संतुलन को मज़बूत करना और भविष्य के लिए स्थायी आय के साधन विकसित करना था।
करीब 1.70 लाख रुपये की लागत से इस कार्य को अंजाम दिया गया, जिसमें मजदूरी मद में 1.18 लाख और सामग्री मद में 0.52 लाख (MNREGA Scheme India) रुपये खर्च हुए। यह कार्य 31 जुलाई 2020 को प्रारंभ होकर 31 अगस्त 2022 में पूर्ण हुआ।
इस दौरान कुल 707 मानव दिवस का सृजन हुआ, जिससे गांव के कई अकुशल श्रमिकों को लगातार काम मिला। परियोजना की खास बात यह रही कि पौधों की देखरेख और मैटेनेंस लगातार तीन वर्षों तक की गई, जिससे हरियाली स्थायी रूप ले सकी।
बंजर ज़मीन से हरित पहचान
औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद ग्राम पंचायत बिजना में इस पहल ने पर्यावरणीय दृष्टि से नई पहचान बनाई है। कभी अनुपयोगी पड़ी ज़मीन पर आज सैकड़ों पौधे लहलहा रहे हैं। ये पौधे न केवल गांव की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता भी पैदा कर रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में योजना का क्रियान्वयन किया गया, जिससे रोपण और संरक्षण दोनों में गुणवत्ता सुनिश्चित हुई।
कस्तूरी की पहल बनी उदाहरण
कस्तूरी बताती हैं कि मनरेगा योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक से संपर्क किया। इसके पश्चात जनपद पंचायत तमनार के अधिकारियों के सहयोग से कार्य को ज़मीन पर उतारा गया।
करीब 200 पौधों के रोपण और उनके संरक्षण की तकनीकी जानकारी मिलने से उन्हें भविष्य में आय के स्थायी साधन विकसित होने की उम्मीद (MNREGA Scheme India) जगी है। आज वे न केवल स्वयं लाभान्वित हो रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।
मनरेगा का बदला स्वरूप
यह उदाहरण बताता है कि मनरेगा अब केवल तत्काल रोज़गार की योजना नहीं रही, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बन चुकी है। गांवों में हरियाली के साथ-साथ आत्मविश्वास भी पनप रहा है।


