सीजी भास्कर, 26 मार्च। Mungeli Engineer Harassment Video : छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) में पदस्थ सब इंजीनियर सोनल जैन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने विभागीय व्यवस्था और जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment Case) और नियमों के विरुद्ध कार्रवाई के आरोप लगाए हैं।
भावुक अंदाज़ में सामने आई इस वीडियो ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
“छोटा जिला, बड़ी परेशानी” — सिस्टम पर उठाए सवाल
अपने फेसबुक पोस्ट और वीडियो के जरिए सोनल जैन ने मुंगेली जैसे छोटे जिले की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि कागजों में विकास की बातें जरूर होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियर्स को लगातार दबाव और प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि मुंगेली में न तो जोमैटो है, न स्विगी, न ही मनोरंजन के साधन, फिर भी इंजीनियर्स यहां रहकर सेवा दे रहे हैं—लेकिन बदले में उन्हें सम्मान नहीं, बल्कि परेशानी मिल रही है।
डिप्टी सीएम को लिखे पत्र से बढ़ी गंभीरता
इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू तब सामने आया, जब सोनल जैन द्वारा लिखा गया पत्र भी वायरल होने लगा। यह पत्र उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री और उप मुख्यमंत्री Vijay Sharma को संबोधित किया है।
पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत सीईओ द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रताड़ित करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से ‘अटैच’ किया गया है। खास बात यह है कि जिस पद पर उन्हें भेजा गया, वहां सब इंजीनियर का पद ही अस्तित्व में नहीं है।
RTI में नहीं मिली शिकायत की पुष्टि
सोनल जैन ने अपने आरोपों में यह भी स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की शिकायत का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में जनपद पंचायत मुंगेली में उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई गई।
इस खुलासे के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है, क्योंकि यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। (RTI Disclosure)
बड़े मंत्रियों से लगाई न्याय की गुहार
वीडियो में सोनल जैन ने छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री Arun Sao और Vijay Sharma का नाम लेते हुए उनसे न्याय की अपील की है।
उन्होंने कहा कि 16 वर्षों की सेवा के बाद इस तरह की कार्रवाई से उनकी छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, जो उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।

विकास की रफ्तार पर भी उठे सवाल
सोनल जैन ने एक अखबार की कतरन साझा करते हुए यह भी बताया कि जिला बनने के 14 साल बाद भी मुंगेली में विकास की रफ्तार बेहद धीमी है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह अधिकारियों का रवैया बना रहा, तो इंजीनियर्स यहां काम करने से बचेंगे, जिसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ेगा।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज
एक महिला अधिकारी का इस तरह खुले तौर पर सामने आकर अपनी बात रखना और सीधे सरकार के शीर्ष स्तर तक गुहार लगाना, प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर चल रही खींचतान की ओर इशारा करता है।
अब यह देखना अहम होगा कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या सोनल जैन को न्याय मिल पाता है या नहीं।


