सीजी भास्कर, 17 जनवरी | दुर्ग नगर निगम से जुड़ा Municipal Commissioner Misuse Case इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। एक कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि निगम कमिश्नर ने उससे सरकारी दायरे से बाहर निजी काम कराए। जब इन मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। कर्मचारी ने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए न्याय की शरण ली।
WhatsApp चैट बनी सबसे बड़ा सबूत
इस Municipal Commissioner Misuse Case में सबसे अहम पहलू यह है कि कर्मचारी ने अपने दावों के समर्थन में वॉट्सऐप चैट की प्रतियां अदालत में पेश की हैं। इन चैट्स में कथित तौर पर फिल्म की टिकट बुक कराने, राशन सामग्री मंगवाने और घर के वाई-फाई का रिचार्ज कराने जैसे संदेश शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि ये सभी मांगें पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आती हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं, तो शुरू हुई विभागीय कार्रवाई
याचिका के मुताबिक, जब कर्मचारी इन निजी निर्देशों को पूरा नहीं कर पाया, तो उसके खिलाफ पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और फिर निलंबन का आदेश थमा दिया गया। कर्मचारी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया दबाव बनाने और प्रतिशोध की भावना से की गई। इसी आधार पर (Administrative Power Abuse) को भी याचिका में प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने क्यों जताई सख्ती
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। अदालत ने पाया कि जिन आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई, उन्हें साबित करने के लिए न तो गवाहों से पूछताछ की गई और न ही निष्पक्ष जांच का पालन हुआ। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी।
जांच रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में सीधे दंड का प्रस्ताव दे दिया, जबकि प्रक्रिया के अनुसार पहले आरोपों की पुष्टि जरूरी होती है। इस बिंदु को (Disciplinary Action Dispute) के रूप में याचिका में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
नोटिस जारी, जवाब के लिए समय तय
हाईकोर्ट ने नगर निगम प्रशासन और राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी तय की गई है। तब तक के लिए कर्मचारी के खिलाफ चल रही पूरी अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर रोक रहेगी।
क्यों अहम है यह मामला
यह Municipal Commissioner Misuse Case केवल एक कर्मचारी और अधिकारी के बीच का विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या प्रशासनिक पद का उपयोग निजी सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। आने वाली सुनवाई में इस मामले का असर अन्य प्रशासनिक मामलों पर भी पड़ सकता है।




