सीजी भास्कर, 12 जनवरी। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग (Narayanpur Women College Suspension) ने वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय, नारायणपुर के प्राचार्य सहित छह प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री उषा (पी.एम. उषा) मद से आबंटित राशि के दुरुपयोग और शासन द्वारा निर्धारित वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बाद की गई है।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामग्री क्रय प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों, प्रक्रियागत अनियमितताओं तथा छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम संहिता 2002 (संशोधित 2025) के उल्लंघन की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई है। इसी आधार पर यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में महाविद्यालय के प्राचार्य योगेंद्र पटेल के साथ सहायक प्राध्यापक भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद एवं नोहर राम के नाम शामिल हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित (Narayanpur Women College Suspension) किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान सभी अधिकारियों का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय जगदलपुर (छत्तीसगढ़) निर्धारित किया गया है। साथ ही, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निलंबन केवल प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई है और मामले की विस्तृत विभागीय जांच अलग से की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध और भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। शासन ने दो टूक कहा है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनुशासनहीनता और नियमों की अनदेखी को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई को राज्य सरकार की “शून्य सहनशीलता नीति” के तहत एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विभाग का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक उद्देश्यों के अनुरूप विद्यार्थियों और संस्थानों तक पहुंचे।


