सीजी भास्कर, 1 अप्रैल। दुनिया एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज (NASA Moon Mission) पर खड़ी है। करीब पांच दशक बाद इंसान दोबारा चंद्रमा की ओर रवाना होने जा रहा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA का महत्वाकांक्षी Artemis II मिशन इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह मिशन न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि भविष्य में चंद्रमा पर मानव बसाहट की तैयारी का आधार भी बनेगा।
क्या है Artemis II मिशन और क्यों है खास (NASA Moon Mission)
Artemis II एक मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की ओर भेजे जाएंगे। हालांकि यह मिशन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा, बल्कि उसकी परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आएगा। इसे एक तरह से ट्रायल मिशन कहा जा रहा है, जो आने वाले Artemis III मिशन के लिए रास्ता तैयार करेगा। इस मिशन के जरिए यह परखा जाएगा कि इंसान लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा को सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकता है या नहीं।
मिशन का रूट और पूरा सफर
लॉन्च के बाद अंतरिक्ष यान पहले पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करेगा, जहां लगभग 24 से 25 घंटे तक विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद यान चंद्रमा की दिशा में बढ़ेगा और करीब 3.8 से 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा। यह अंतरिक्ष यान चंद्रमा के बेहद करीब से गुजरते हुए उसकी परिक्रमा करेगा और फिर “फ्री रिटर्न ट्रेजेक्टरी” के जरिए वापस पृथ्वी की ओर लौट आएगा। यह तकनीक ऐसी है कि किसी आपात स्थिति में यान बिना अतिरिक्त ईंधन के भी सुरक्षित लौट सकता है।
कितने दिन का होगा मिशन
पूरा Artemis II मिशन लगभग 10 दिनों का होगा। शुरुआती दो दिन पृथ्वी की कक्षा में परीक्षण के लिए होंगे, इसके बाद चंद्रमा की ओर लंबा सफर शुरू होगा। चंद्रमा के आसपास पहुंचकर यान कुछ समय वहां बिताएगा और फिर वापसी की यात्रा शुरू करेगा। दसवें दिन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट आएंगे।
कौन-कौन हैं मिशन का हिस्सा
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं-रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन। खास बात यह है कि यह टीम विविधता का प्रतीक है, जिसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उदाहरण बनेगा।
वापसी कैसे होगी और क्या है चुनौती
मिशन का सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण हिस्सा पृथ्वी (NASA Moon Mission) पर वापसी है। अंतरिक्ष यान जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तब अत्यधिक तापमान पैदा होगा। इस दौरान यान की हीट शील्ड अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेगी। अंत में कैप्सूल समुद्र में लैंड करेगा, जहां पहले से मौजूद टीमें उसे रिकवर करेंगी।
भविष्य की दिशा तय करेगा मिशन
Artemis II को सिर्फ एक मिशन नहीं बल्कि अंतरिक्ष के भविष्य की नींव माना जा रहा है। इसके सफल होने के बाद Artemis III मिशन के जरिए इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की तैयारी है। इसके साथ ही मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
यह मिशन विज्ञान, तकनीक और मानव जिज्ञासा का संगम है, जो आने वाले समय में अंतरिक्ष अन्वेषण की नई कहानी लिख सकता है।


