सीजी भास्कर, 11 सितंबर। आपसी सुलह यानी (Settlement) के जरिए लंबित मामलों का त्वरित निपटारा(National Lok Adalat) करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली के तत्वावधान में 13 सितम्बर 2025 को देशभर में (National Lok Adalat) का आयोजन किया जा रहा है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) बिलासपुर के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के सभी जिला व व्यवहार न्यायालयों में भी यह विशेष आयोजन होगा। यह कैलेण्डर वर्ष 2025 की तीसरी नेशनल लोक अदालत होगी, जबकि 13 दिसम्बर को अंतिम लोक अदालत आयोजित की जाएगी।
नेशनल लोक अदालत(National Lok Adalat) के दिन जिला न्यायालयों और तालुका न्यायालयों में राजीनामा योग्य मामलों जैसे मोटर दुर्घटना दावा, 138 एनआई एक्ट के अंतर्गत चेक बाउंस, धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत भरण-पोषण विवाद, मेट्रोमोनियल (Disputes) और छोटे आपराधिक प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। इसके साथ ही जलकर, संपत्ति कर, ट्रैफिक चालान, किराया नियंत्रण, आबकारी और (Bank Recovery) जैसे प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी निपटाया जाएगा।
न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की बढ़ती संख्या को कम करना और पक्षकारों को शीघ्र व सुलभ न्याय उपलब्ध कराना ही लोक अदालत का प्रमुख उद्देश्य है। यही वजह है कि इसे देश की न्यायिक व्यवस्था में त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
विशेष खंडपीठों का गठन
नेशनल लोक अदालत के लिए जिला एवं व्यवहार न्यायालयों(National Lok Adalat) में विशेष खंडपीठों का गठन किया जाएगा। इन खंडपीठों में विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा आपसी सहमति और समझौते के आधार पर किया जाएगा। इसमें मोटर दुर्घटना दावा, सिविल केस, बैंक रिकवरी, विद्युत संबंधी विवाद, पारिवारिक विवाद और राजस्व से जुड़े केस प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
इसके अलावा प्री-लिटिगेशन प्रकरण जैसे बैंक बकाया, बिजली बिल बकाया, दूरसंचार कंपनियों के बकाया, नगर निगम और नगर पालिका परिषद से जुड़े कर वसूली के मामले भी प्रस्तुत किए जाएंगे। पंजीयन के बाद संबंधित पक्षकारों को (Lok Adalat) की खंडपीठ में सुनवाई का अवसर मिलेगा।
न्याय सुलभ बनाने की पहल
नेशनल लोक अदालत में समझौते के आधार पर निराकृत मामलों को अंतिम और बाध्यकारी माना जाएगा। इस तरह पक्षकारों को लंबी अदालती प्रक्रिया से राहत मिलती है और खर्च भी बचता है। यही कारण है कि लोग लोक अदालत में अपने मामले लेकर आने में रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को सरल, सुलभ और तेज़ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे न्यायालयों का बोझ कम होगा और आम लोगों को न्याय पाने का नया भरोसा मिलेगा।


