सीजी भास्कर, 06 फरवरी। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक और जनजातीय कला को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है। कला, संस्कृति और शोध के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय एक नाम ने राज्य को ऐसा गौरव दिलाया है, जिसे लंबे समय तक याद (National Tagore Fellowship) किया जाएगा। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी बड़ी मान्यता मानी जा रही है।
रायपुर। वरिष्ठ संस्कृति एवं संग्रहालय विशेषज्ञ अशोक तिवारी को भारत सरकार की प्रतिष्ठित नेशनल टैगोर फेलोशिप के लिए चयनित किया गया है। वे छत्तीसगढ़ से इस सम्मानजनक शोधवृत्ति को प्राप्त करने वाले पहले अध्येता बन गए हैं। यह फेलोशिप उन्हें छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय चित्रकला और मूर्तिकला पर गहन शोध के लिए प्रदान की गई है।
अशोक तिवारी का शोध विषय “Sacred and Decorative: Painted and Sculpted Folk and Tribal Arts of Chhattisgarh” है, जिसके अंतर्गत वे राज्य की पारंपरिक कला परंपराओं के धार्मिक, सामाजिक और सौंदर्यात्मक पक्षों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इस शोधवृत्ति की अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि टैगोर फेलोशिप सांस्कृतिक अनुसंधान के क्षेत्र में देश की सबसे प्रतिष्ठित शोधवृत्तियों में गिनी जाती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ से पहली बार किसी शोधकर्ता का चयन होना राज्य के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
अशोक तिवारी पिछले पांच दशकों से अधिक समय से संस्कृति, संग्रहालय अध्ययन और लोक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में लगभग तीन दशकों तक सेवाएं देते हुए इस राष्ट्रीय संस्था के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खानपान केंद्र गढ़कलेवा की परिकल्पना और निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका (National Tagore Fellowship) रही है। इसके साथ ही रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में बनी पहली मुक्ताकाश प्रदर्शनी “आमचो बस्तर” का क्यूरेशन भी उन्होंने ही किया था, जिसे कला जगत में विशेष सराहना मिली।
बीते लगभग आठ वर्षों से वे देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में निवासरत प्रवासी छत्तीसगढ़िया समाज पर लगातार शोध कर रहे हैं। इस विषय पर उनकी चार पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नेशनल टैगोर फेलोशिप के लिए अशोक तिवारी का चयन छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और अकादमिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना (National Tagore Fellowship) जा रहा है। इससे राज्य की लोक एवं जनजातीय कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




