सीजी भास्कर 25 फ़रवरी नवा रायपुर में प्रस्तावित फिल्म सिटी प्रोजेक्ट को लेकर विवाद तेज होता जा रहा है। माना क्षेत्र के तूता इलाके में करीब 1500 पेड़ों की कटाई की तैयारी की खबर सामने आते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई है। इलाके के रहवासियों का कहना है कि वर्षों में तैयार हुआ हरित क्षेत्र एक झटके में खत्म करने की योजना बनाई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है और (Nava Raipur Film City Tree Cutting Protest) को पर्यावरण बचाने की लड़ाई बताया जा रहा है।
पेड़ों से चिपककर विरोध, चिपको आंदोलन की तर्ज पर प्रदर्शन
आज कांग्रेस के कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौके पर पहुंचकर पेड़ों से चिपककर विरोध प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन को प्रतीकात्मक रूप से चिपको आंदोलन की तर्ज पर रखा गया है, ताकि सरकार तक यह संदेश पहुंचे कि विकास के नाम पर हरियाली की बलि स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल फिल्म सिटी का मामला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस लेने की जगह बचाने की लड़ाई है। इसे (Film City Tree Cutting Protest) के रूप में पर्यावरणीय चेतावनी माना जा रहा है।
कल भी मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता, जताई थी नाराजगी
प्रदर्शन की यह श्रृंखला अचानक शुरू नहीं हुई है। इससे पहले भी स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता तूता इलाके में पहुंचकर पेड़ों की कटाई के फैसले पर आपत्ति जता चुके हैं। नेताओं ने मौके पर निरीक्षण कर प्रशासन से काम रोकने की मांग की थी। उनका कहना है कि अगर वैकल्पिक जगह उपलब्ध है, तो हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना समझ से परे है। (Nava Raipur Film City Tree Cutting Protest) अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।
पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज
फिल्म सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट को लेकर रोजगार और निवेश की दलीलें दी जा रही हैं, वहीं पर्यावरणविद इसे शहरी हरियाली पर सीधा हमला मान रहे हैं। स्थानीय संगठनों का तर्क है कि बिना समुचित पर्यावरणीय आकलन के इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भविष्य में जलवायु और तापमान पर असर डाल सकती है। इसी टकराव ने (Nava Raipur Film City Tree Cutting Protest) को राज्यस्तरीय बहस का मुद्दा बना दिया है।






