सीजी भास्कर, 9 दिसंबर। पंजाब की राजनीति उस समय गर्मा गई जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu Suspended) के बयान को लेकर विवाद तेज हो गया। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के बदले कांग्रेस को 500 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। बयान सामने आते ही कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाते हुए डॉ. सिद्धू को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने उनके निलंबन का आदेश जारी किया। इससे पहले पार्टी हाईकमान ने उनकी टिप्पणी को अनुशासनहीनता बताते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा था, जिस पर डॉ. सिद्धू ने दावा किया था कि उन्होंने यह टिप्पणी कांग्रेस को लेकर नहीं की थी।
बाजवा पर 5-5 करोड़ लेने का दावा
निलंबन (Navjot Kaur Sidhu Suspended) से पहले नवजोत कौर सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर भी हमला बोला। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि तरनतारन विधानसभा उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी करणबीर सिंह से टिकट के बदले राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने 5-5 करोड़ रुपये लिए थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सिर्फ सत्ता की दौड़ में लगा है और इसी कारण पार्टी कमजोर हुई। उनके अनुसार बाजवा भाजपा से और वड़िंग भगवंत मान से मिले हुए हैं, जबकि सुखजिंदर रंधावा पर उन्होंने गैंग्स्टरों से संबंध होने का आरोप लगाया।
कांग्रेस विपक्ष की भूमिका नहीं निभा रही
नवजोत कौर (Navjot Kaur Sidhu Suspended) ने कहा कि पंजाब कांग्रेस की वर्तमान स्थिति नेताओं की महत्वाकांक्षा और आपसी खींचतान का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि चन्नी, वड़िंग, बाजवा और रंधावा सभी मुख्यमंत्री पद की चाह रखते हैं और इसी वजह से पार्टी कमजोर हुई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 2022 में नवजोत सिंह सिद्धू को हराने के लिए पार्टी के भीतर से पैसे खर्च किए गए। हालांकि उन्होंने दोहराया कि नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ खड़े हैं और रहेंगे।
रंधावा–बाजवा का पलटवार, कहा—पहले अपने घर देखें
उनके आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरदासपुर सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने सवाल किया कि जब नवजोत सिंह सिद्धू को कैबिनेट में नंबर दो की पोज़ीशन दी गई थी तब उन्होंने कितना पैसा दिया था। रंधावा ने टिप्पणी की कि सिद्धू परिवार चार साल तक सार्वजनिक रूप से सक्रिय नहीं रहा और चुनावी साल आते ही अचानक सामने आ गया।
वहीं नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि नवजोत कौर सिद्धू को अपने आरोपों पर विचार करने के लिए किसी अच्छे डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए। राजनीतिक माहौल में आए इस टकराव ने चुनावी वर्ष में पंजाब कांग्रेस के भीतर उभर रहे तनाव और अविश्वास को और स्पष्ट कर दिया है।





