सीजी भास्कर, 06 जून। नारायणपुर जिले के माड़ क्षेत्र में शनिवार को सुरक्षा बलों की एक कार्रवाई चर्चा का विषय (Naxal Memorial) बनी रही। इलाके में सुबह से ही हलचल का माहौल था और ग्रामीणों के बीच भी इस अभियान को लेकर बातचीत होती रही। जब भारी मशीनें और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तो लोगों की नजरें पूरे घटनाक्रम पर टिकी रहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। सड़क, शिक्षा और अन्य सुविधाओं के विस्तार के बीच हुई इस कार्रवाई को कई लोग बदलते माहौल से जोड़कर देख रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी इसे क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही हैं।
दो स्मारकों पर हुई कार्रवाई : Naxal Memorial
नारायणपुर जिले के माड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सली प्रभाव के प्रतीक माने जाने वाले दो स्मारकों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई आईटीबीपी की 41वीं वाहिनी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने की। बताया गया कि ग्राम उसेबेड़ा और कस्तूरमेटा दो में बने इन स्मारकों को जेसीबी मशीन की मदद से हटाया गया।
सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान
अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बनाए रखी। अधिकारियों के अनुसार इन संरचनाओं को नक्सली प्रभाव और हिंसा के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई और पूरे घटनाक्रम पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी रही।
ग्रामीणों ने किया सहयोग
अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय ग्रामीणों का भी सहयोग (Naxal Memorial) मिला। कई लोगों ने इसे क्षेत्र के हित में उठाया गया कदम बताया। ग्रामीणों का मानना है कि अब क्षेत्र में विकास कार्यों को अधिक गति मिल रही है और लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं।
विकास की ओर बढ़ रहा माड़
पिछले कुछ वर्षों में माड़ क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इसका असर स्थानीय जीवन पर भी दिखाई देने लगा है। युवाओं में रोजगार और शिक्षा को लेकर नई सोच विकसित हो रही है और वे मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आगे भी जारी रहेंगे अभियान
अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभियान आगे (Naxal Memorial) भी जारी रहेंगे। उनके अनुसार यह कार्रवाई केवल स्मारकों को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि माड़ क्षेत्र में बदलते हालात और घटते नक्सली प्रभाव की तस्वीर भी सामने लाती है।




