सीजी भास्कर 22 फरवरी Naxal Surrender Telangana : तेलंगाना में सुरक्षाबलों के सामने माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो से जुड़े वरिष्ठ सदस्य देवजी ने 18 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। फील्ड-ऑपरेशंस की तीव्रता, नेटवर्क पर लगातार चोट और घेराबंदी के बीच यह कदम संगठन के भीतर बढ़ती हताशा की तस्वीर पेश करता है। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटनाक्रम से कई सेक्टरों में कमांड-चेन ढीली पड़ने की आशंका है।
रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक असर, संगठन की कमर पर वार
देवजी जैसे शीर्ष चेहरे का सरेंडर सिर्फ फील्ड-लेवल झटका नहीं, बल्कि रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक असर भी छोड़ता है। सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि इससे कैडर का मनोबल टूटता है, सप्लाई-लाइन बाधित होती है, और शेष नेटवर्क के भीतर भरोसे की दरारें गहरी होती हैं। सीमावर्ती कॉरिडोर में सक्रिय सेल्स पर इसका तत्काल दबाव पड़ेगा।
‘कुछ नाम शेष हैं, उन्हें भी मुख्यधारा में लाया जाएगा’
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बड़े चेहरों के निष्क्रिय होने के बाद यह आत्मसमर्पण निर्णायक संकेत है। उन्होंने बताया कि शेष निष्क्रिय नेटवर्क को भी सरेंडर के लिए प्रेरित किया जाएगा, और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
पुनर्वास रोडमैप: बैंकिंग, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन
सरेंडर के बाद पुनर्वास पैकेज के तहत बैंक खाते, कौशल-प्रशिक्षण, खेती-किसानी और सामाजिक पुनर्स्थापन जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रशासन का जोर इस पर है कि लौटने वालों को वैकल्पिक रोज़गार मिले, ताकि दोबारा हिंसक राह पर लौटने की गुंजाइश न रहे।
शीर्ष स्तर पर लगातार टूटन, पहले भी कई नाम लौटे
पिछले महीनों में शीर्ष स्तर पर लगातार टूटन दर्ज हुई है। अलग-अलग राज्यों में कई वरिष्ठ कैडर ने आत्मसमर्पण किया, जिससे नेटवर्क की संचालन क्षमता प्रभावित हुई। एजेंसियों का कहना है कि फंडिंग चैनल, संपर्क-श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स पर समानांतर कार्रवाई जारी है, ताकि बचे हुए सेल्स को भी निरस्त्र किया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, वित्तीय ट्रेल की जांच तेज
आत्मसमर्पण के साथ-साथ डिजिटल ट्रेल, सीमा-पार संपर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच तेज की गई है। लक्ष्य यह है कि नेटवर्क की रीढ़ मानी जाने वाली सप्लाई-लाइन को स्थायी तौर पर तोड़ा जाए, और शांति प्रक्रिया को जमीन पर मजबूती मिले।






