(Naxalism Free India) को लेकर विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh ने केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah को पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने 31 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि यह देश के लिए नई आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है, जहां दशकों से चली आ रही नक्सल समस्या के अंत की दिशा साफ दिखाई दे रही है।
मोदी नेतृत्व की सराहना, Strong Leadership Role पर दिया जोर
(Strong Leadership Role) को रेखांकित करते हुए रमन सिंह ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की भी प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और रणनीतिक दृष्टिकोण ने ही यह संभव किया है कि देश अब नक्सलवाद जैसी चुनौती से बाहर निकलता दिख रहा है।
विचारधारा पर प्रहार, Maoist Ideology पर उठाए सवाल
(Maoist Ideology) पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों तक लोकतंत्र विरोधी सोच ने देश को भीतर से कमजोर किया। नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हिंसा का दायरा बढ़ा, जिससे विकास बाधित हुआ और आदिवासी समाज मुख्यधारा से दूर होता चला गया।
पुराने दौर का जिक्र, UPA Government Role पर सवाल
(UPA Government Role) को याद करते हुए रमन सिंह ने लिखा कि पहले नक्सलवाद को राज्य की समस्या बताकर केंद्र ने खुद को अलग रखा। हालांकि बाद में पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना, लेकिन समाधान के स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सलवा जुडूम और बस्तर की बात, Bastar Development Vision सामने
(Bastar Development Vision) के तहत उन्होंने सलवा जुडूम आंदोलन और बस्तर के हालात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ, लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। अब हालात बदल रहे हैं और बस्तर में विकास की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
अमित शाह को ‘साध्य पुरुष’, Historic Recognition का जिक्र
(Historic Recognition) के रूप में रमन सिंह ने अमित शाह की तुलना देश के पहले गृह मंत्री Sardar Vallabhbhai Patel से करते हुए उन्हें “साध्य पुरुष” बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पटेल ने देश को एकजुट किया, उसी तरह वर्तमान दौर में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में अमित शाह की भूमिका अहम रही है।
बस्तर में नई शुरुआत, Development After Naxalism पर उम्मीदें
(Development After Naxalism) को लेकर उन्होंने विश्वास जताया कि अब बस्तर में विकास का नया दौर शुरू होगा। आदिवासी समाज को रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।


