सीजी भास्कर, 29 मई। नीट परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को कड़े सवालों का सामना (NEET Paper Leak) करना पड़ा। अदालत की टिप्पणियों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जो लंबे समय से इस मामले में जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर चिंता जताई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद शिक्षा जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों युवा वर्षों की मेहनत और उम्मीदों के साथ इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है।
निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल : NEET Paper Leak
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से पूछा कि जब निगरानी समितियां और सुरक्षा तंत्र मौजूद थे, तब प्रश्नपत्र लीक जैसी गंभीर घटना कैसे हो गई। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना आवश्यक है और ऐसी घटनाएं पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
संघ लोक सेवा आयोग का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां इस प्रकार की घटनाएं सामने नहीं आती हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सफल संस्थागत मॉडलों से सीख लेने की जरूरत है।
उच्च स्तरीय समिति से भी मांगा जवाब
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा कि समिति की सिफारिशों के बाद उनके क्रियान्वयन की निगरानी कितनी प्रभावी रही। अदालत ने यह भी जानना (NEET Paper Leak) चाहा कि कौन से ऐसे पहलू थे जिन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण पहले से सुझाए गए सुरक्षा उपायों के बावजूद प्रश्नपत्र लीक की घटना सामने आई।
युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लाखों छात्र अपनी पढ़ाई, समय और भावनाएं इन परीक्षाओं में लगाते हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि युवाओं को निराश नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके भविष्य और मेहनत से जुड़ा यह बेहद संवेदनशील विषय है।
विशेषज्ञों और विश्वविद्यालयों से सहयोग का सुझाव
सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रमुख विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों का सहयोग लिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि बदलती तकनीक और नई चुनौतियों को देखते हुए लगातार सुधार और विशेषज्ञ सलाह की जरूरत है।
केंद्र सरकार से मांगा विस्तृत हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए (NEET Paper Leak) जाएंगे। अदालत ने विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति, संस्थागत व्यवस्था और संसाधनों को मजबूत करने के संबंध में भी जानकारी मांगी है।
दो जुलाई से पहले देना होगा जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संबंधित मंत्रालय को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करना होगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई और केंद्र सरकार के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।




