सीजी भास्कर, 9 सितंबर। नेपाल की राजधानी काठमांडू(Nepal political Crisis) इन दिनों विरोध प्रदर्शनों की जद में आ गई है। सोमवार देर रात हालात उस समय बेकाबू हो गए जब गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर आगजनी और पथराव किया, बल्कि राष्ट्रपति के निजी आवास तक पहुंचकर कब्ज़ा कर लिया। हालात को काबू में करने के लिए लगाए गए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू का भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
सत्ताधारी दल और सरकारी ठिकाने बने निशाना
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा। मंत्रियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और नेपाल के केंद्रीय बैंक गवर्नर के घरों को भी निशाना बनाया गया। सरकारी दफ्तरों और राजनीतिक दलों के दफ्तरों(Nepal political Crisis) में तोड़फोड़ की गई। वहीं जनकपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय और सत्तारूढ़ दल के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया।
युद्ध का मैदान बनी राजधानी
काठमांडू की मुख्य सड़कें अब रणभूमि जैसी दिख रही हैं। जगह-जगह टायर जलाए जा रहे हैं और पुलिस बल पर पथराव हो रहा है। भीषण झड़पों में कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी(Nepal political Crisis) घायल हो गए हैं। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और आम नागरिकों के बीच भय का माहौल है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता
नेपाल के हालात पर अंतरराष्ट्रीय जगत भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव कार्यालय ने बयान जारी कर कहा है कि नेपाल में हिंसा और अस्थिरता पर गहरी नजर रखी जा रही है। साथ ही अपील की गई है कि सभी पक्ष संयम बरतें और जल्द से जल्द शांति बहाल हो।
पीएम ओली पर बढ़ा दबाव
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि “विरोध प्रदर्शनों के दौरान जो अप्रिय घटनाएं हुईं, उनसे मैं बेहद दुखी हूं।” हालांकि, आंदोलनकारियों का रुख कड़ा है और वे उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। बांके सहित कई जिलों में छात्र संगठनों(Nepal political Crisis) ने आंदोलन की बागडोर संभाल रखी है और विरोध तेज होता जा रहा है।


