सीजी भास्कर, 16 जनवरी। नेशनल हाईवे-53 (NH-53 Road Accident) अब हादसों का नहीं, बल्कि मौत का हाईवे बनता जा रहा है। भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार, कमजोर निगरानी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते शुक्रवार सुबह आरंग थाना क्षेत्र के पारागांव के पास एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पिता मंगलू जलक्षत्री और उनका 6 वर्षीय मासूम बेटा तिलक जलक्षत्री शामिल हैं। हादसे में एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर मछली पकड़ने जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे हाइवा वाहन ने उनकी बाइक को कुचल दिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर कई फीट दूर जा गिरे। हादसे के बाद शव सड़क पर क्षत-विक्षत हालत में पड़े मिले, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
बेलगाम रफ्तार, फेल निगरानी और चुप प्रशासन
यह कोई पहला मामला नहीं है जब (NH-53 Road Accident) ने लोगों की जान ली हो। इसके बावजूद न तो भारी वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाई जा रही है और न ही हाईवे पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-53 पर हाइवा और ट्रकों की रफ्तार हमेशा तेज रहती है, लेकिन परिवहन विभाग और पुलिस की चेकिंग केवल कागजों तक सीमित है।
हादसे के बाद हाइवा चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया, जो प्रशासनिक ढिलाई का एक और उदाहरण है। सूचना मिलने पर आरंग पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने हाइवा वाहन को जब्त कर लिया है, लेकिन फरार चालक की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है।
सरकारी दावों की खुली पोल
सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन (NH-53 Road Accident) जैसी घटनाएं इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं। हाईवे पर न तो स्पीड कंट्रोल सिस्टम प्रभावी है, न पर्याप्त साइन बोर्ड और न ही लगातार पेट्रोलिंग। नतीजा यह है कि मासूम बच्चे तक बेलगाम रफ्तार का शिकार हो रहे हैं।
इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि एनएच-53 को “मौत का हाईवे” बनने से रोका जाए, भारी वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और दोषी चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सवाल जो सरकार से पूछे जा रहे हैं
आखिर कब तक एनएच-53 पर जान जाती रहेगी?
भारी वाहनों की रफ्तार पर निगरानी क्यों नहीं?
हर हादसे के बाद जांच का भरोसा, लेकिन ठोस कार्रवाई कब?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस (NH-53 Road Accident) के बाद भी सरकार नींद में रहेगी, या फिर किसी और पिता और मासूम की जान जाने का इंतजार किया जाएगा।


