सीजी भास्कर, 07 फरवरी | Nivedita Chatterjee Resignation Row : रायपुर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सचिव निवेदिता चटर्जी के इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। निवेदिता ने अपने त्यागपत्र में संगठन के भीतर लंबे समय से उपेक्षा और जिम्मेदारी न मिलने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नेतृत्व पर सीधे आरोप
इस्तीफे के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का नाम खुलकर सामने आया है। आरोप है कि संगठन में वर्षों तक सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी को उजागर कर दिया है।
‘औकात’ बयान से बढ़ी तल्खी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दीपक बैज की हैसियत नहीं कि वे किसी को कुछ बना सकें। मिश्रा ने कांग्रेस पर स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ वादे करती है, ज़मीनी स्तर पर कुछ भी नहीं होता।
पार्टी बदलने की नसीहत
विधायक मिश्रा ने निवेदिता चटर्जी को खुली सलाह देते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस नेतृत्व के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में मेहनत करने वालों को कभी सम्मान नहीं मिलता, ऐसे में बेहतर है कि वे दूसरी राजनीतिक राह चुनें।
प्रशिक्षण पर सवाल
कांग्रेस के हालिया प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी मिश्रा ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में खुद नेतृत्व की दिशा तय नहीं है, वह दूसरों को प्रशिक्षण क्या देगी। आरोप लगाया गया कि प्रशिक्षण के नाम पर उन्हीं चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिन पर पहले से सवाल खड़े हैं।
कार्यकारिणी को लेकर तंज
विधायक ने कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर भी कटाक्ष किया। उनका कहना था कि नेतृत्व महीनों से कार्यकारिणी तक गठित नहीं कर पा रहा, जिससे यह साफ होता है कि संगठन भीतर से कितना बिखरा हुआ है। समय मिलने के बावजूद काम न होना, पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।
आगे और बढ़ सकता है विवाद
निवेदिता चटर्जी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में असंतोष की आवाज़ और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हुई, तो ऐसे मामले आगे भी सामने आ सकते हैं।




