सीजी भास्कर, 4 जनवरी। राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक समृद्धि को ध्यान में रखते हुए आयल पॉम की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत आयल पॉम की खेती करने वाले किसानों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान के अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से टॉपअप के रूप में अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। सरकार के इस कदम से आयल पॉम की खेती को लेकर किसानों में रुचि बढ़ रही है, जिसे आयल पॉम की खेती को बढ़ावा देने वाली योजना (Oil Palm Farming Subsidy) के रूप में देखा जा रहा है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त अनुदान के अलावा राज्य सरकार किसानों को कुल 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर का अतिरिक्त टॉपअप अनुदान प्रदान करेगी। यह सहायता रखरखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रिप सिंचाई और फेंसिंग जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए दी जाएगी। रखरखाव के लिए पहले से मिल रहे 5,250 रुपये के अतिरिक्त अब 1,500 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। इसी तरह अंतरवर्तीय फसल के लिए 5,250 रुपये के साथ 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो आयल पॉम की खेती में लागत संतुलन योजना (Oil Palm Farming Subsidy) को मजबूत करता है।
ड्रिप सिंचाई व्यवस्था के लिए पहले से स्वीकृत 14,130 रुपये के अतिरिक्त अब 8,635 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉपअप भी दिया जाएगा। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने पहली बार फेंसिंग के लिए भी 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान देने का निर्णय लिया है। इससे जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा सुनिश्चित होगी और आयल पॉम की खेती में जोखिम कम करने की पहल (Oil Palm Farming Subsidy) को बल मिलेगा।
आयल पॉम एक दीर्घकालीन फसल है, जिसमें रोपण के चौथे वर्ष से उत्पादन शुरू हो जाता है और लगभग 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है। पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में इसकी तेल उत्पादन क्षमता 4 से 6 गुना अधिक मानी जाती है। यही कारण है कि इसे किसानों के लिए लाभकारी दीर्घकालीन विकल्प (Oil Palm Farming Subsidy) माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस योजना से किसानों की आय में स्थायित्व आएगा और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक किसान शेखर जायसवाल, मोबाइल नंबर 8103998548 पर संपर्क कर सकते हैं। यह पहल आयल पॉम खेती आधारित कृषि सुधार प्रयास (Oil Palm Farming Subsidy) के रूप में किसानों को दीर्घकालीन लाभ देने वाली साबित हो सकती है।


