सीजी भास्कर, 9 जनवरी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1 जनवरी 2026 से समस्त शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। कार्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और समयपालन को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों पर अब प्रभावी नियंत्रण नजर आ रहा है। शासन की इस पहल से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है और आमजन में भरोसा बढ़ा है, जिससे ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था (Online Attendance System) को लेकर सकारात्मक माहौल बना है।
कलेक्ट्रेट कोरबा में स्वयं कलेक्टर कुणाल दुदावत प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। कलेक्टर द्वारा समयपालन का उदाहरण प्रस्तुत किए जाने का प्रत्यक्ष प्रभाव अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी दिखाई दे रहा है। अब अधिकांश कर्मचारी समय से पहले कार्यालय पहुंचने लगे हैं, जिससे जनसंबंधित कार्यों के निपटारे में तेजी आई है। यह बदलाव प्रशासनिक अनुशासन में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली (Online Attendance System) के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू होने के बाद विभागीय कार्यों में समयबद्धता और निरंतरता देखने को मिल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने एवं जाने दोनों समय मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक कार्यालय का निर्धारित लोकेशन आधार बेस सिस्टम में फीड किया गया है, जिससे उपस्थिति केवल कार्यालय परिसर के आसपास रहते हुए ही दर्ज की जा सकती है। इससे अनाधिकृत अनुपस्थिति, देरी से आने और समय से पहले कार्यालय छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सका है। प्रशासनिक स्तर पर इसे पारदर्शी व्यवस्था (Online Attendance System) का मजबूत आधार माना जा रहा है।
शासन की इस पारदर्शी व्यवस्था की सर्वत्र सराहना हो रही है। लंबे समय से आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की यह शिकायत रहती थी कि कई कार्यालयों में कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते और अधिकारी दौरे के नाम पर अनुपस्थित पाए जाते हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस लागू होने के बाद ऐसी शिकायतों में स्पष्ट कमी आई है और कार्यालयों की कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। आमजन को अब समय पर सेवाएं मिलने लगी हैं, जो कार्य संस्कृति में सुधार (Online Attendance System) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
शहर के आम नागरिक परमेश्वर यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह बेहतरीन पहल की है। यह व्यवस्था बहुत पहले लागू हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल, तहसील और स्कूलों में समयपालन को लेकर हमेशा शिकायतें रहती थीं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर समय पर नहीं आते थे, नर्सिंग स्टाफ भी अनुपस्थित रहता था और तहसील में बाबू नहीं मिलने की समस्या आम थी। अब ऑनलाइन अटेंडेंस से व्यवस्थाओं में सुधार होगा। उन्होंने सभी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की भी मांग की, ताकि निगरानी और पारदर्शिता और मजबूत हो सके। नागरिकों का मानना है कि जवाबदेही तय करने में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था (Online Attendance System) अहम भूमिका निभाएगी।
इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी कमलज्योति ने बताया कि आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था न केवल समयपालन को बढ़ावा देती है, बल्कि विभागीय कार्यों की निरंतरता और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा नियुक्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का दायित्व है कि वह निर्धारित समयानुसार कार्यालय पहुंचे और आमजन से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करे। यह जिम्मेदारी तय करने का प्रभावी माध्यम ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली (Online Attendance System) बनकर सामने आई है।
पीआरओ कमलज्योति ने यह भी कहा कि शासन की यह पहल अत्यंत सराहनीय है और इसे और अधिक कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है। जो अधिकारी या कर्मचारी बिना ठोस कारण के समय पर उपस्थित नहीं होते, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई तथा आवश्यकता होने पर वेतन कटौती जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इससे समयपालन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और लापरवाह कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना विकसित होगी। विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों, तहसीलों और आम नागरिकों से सीधे जुड़े कार्यालयों में इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है।




