सीजी भास्कर, 21 जनवरी। स्काई एक्सचेंज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा रैकेट का संचालन कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने वाला भगोड़ा सटोरिया आयुष सिन्हा उर्फ दीप लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था। देशभर में फरारी के दौरान धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहा यह सटोरिया अंततः सरगुजा पुलिस के सटीक और गोपनीय अभियान के चलते पुणे एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। यह पूरा मामला ऑनलाइन सट्टा रैकेट (Online Betting Racket) के संगठित नेटवर्क और उसकी परतों को उजागर करता है।
जानकारी के अनुसार आयुष सिन्हा उर्फ दीप ने महाराष्ट्र के पुणे को अपना अस्थायी ठिकाना बनाया था। पुणे के पॉश इलाके में वह 40 हजार रुपये प्रतिमाह किराए के मकान में रह रहा था। फरवरी 2025 से अब तक वह देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों में दर्शन-पूजन करता घूमता रहा। सट्टे से कमाई गई संपत्ति के सहारे ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा यह भगोड़ा सटोरिया मंदिर-मंदिर घूमते हुए खुद को सुरक्षित मान रहा था, लेकिन सरगुजा पुलिस उसकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थी। यह कार्रवाई ऑनलाइन सट्टा रैकेट (Online Betting Racket) से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
पुलिस को सूचना मिली थी कि दीप पुणे से रायपुर आने की तैयारी में है। इस इनपुट को बेहद गोपनीय रखते हुए सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल (आईपीएस) ने पूरे ऑपरेशन की कमान खुद संभाली। केवल तीन आरक्षकों को साथ लेकर वे मध्यरात्रि के बाद स्वयं वाहन चलाते हुए पुणे के लिए रवाना हुए। पुणे पहुंचने के बाद तकनीकी निगरानी से यह स्पष्ट हुआ कि दीप शाम की फ्लाइट से रायपुर जाने वाला है। पुलिस ने पुणे एयरपोर्ट पर जाल बिछाया। फ्लाइट से कई घंटे पहले ही दीप एयरपोर्ट के पास एक होटल में ठहरा था। जैसे ही वह शाम को एयरपोर्ट पहुंचा, सीएसपी राहुल बंसल ने टीम के साथ उसे धर दबोचा। यह गिरफ्तारी ऑनलाइन सट्टा रैकेट (Online Betting Racket) के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद दीप को न्यायालय में प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया और पुलिस टीम सीधे अंबिकापुर के लिए रवाना हुई। लगभग 16 घंटे की लंबी यात्रा के बाद सरगुजा पुलिस उसे लेकर अंबिकापुर पहुंची। यहां न्यायालय से पुलिस रिमांड प्राप्त कर उससे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में ऑनलाइन सट्टे से अर्जित संपत्तियों, लेन-देन और पूरे रैकेट के संचालन से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि ऑनलाइन सट्टा रैकेट से जुड़े कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आयुष सिन्हा उर्फ दीप को पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका था। पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए वह सिम कार्ड वाले मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता था। संपर्क के दौरान इंटरनेशनल कॉल दिखाने के लिए वह वीपीएन तकनीक का सहारा लेता था, जिससे कॉल इंडोनेशिया जैसे देशों से आती प्रतीत होती थी। बावजूद इसके, तकनीकी दक्षता और लगातार निगरानी के जरिए पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि करीब एक साल की फरारी के दौरान वह दीपावली के समय अपनों से मिलने आया था, लेकिन घर पर ठहरने के बजाय शहर के बाहर एक गुप्त ठिकाने में रुका और फिर लौट गया। पुणे से रायपुर आने की उसकी मंशा अधिवक्ताओं से मिलकर अपने प्रकरण की स्थिति जानने की थी। फरारी के दौरान वह देवी-देवताओं के दर्शन और पूजा-अर्चना में लगा रहा तथा बाबा महाकाल सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों में मत्था टेकता रहा।


