सीजी भास्कर, 29 दिसंबर | प्रदेश के बड़े नगर निगमों में (Online Property Tax Payment) की व्यवस्था लागू हुए लगभग पाँच साल हो चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। बिलासपुर, रायपुर समेत सात नगर निगमों में आज भी आधे से ज्यादा लोग टैक्स जमा करने के लिए ऑनलाइन नहीं, बल्कि निगम दफ्तर जाना ही बेहतर मानते हैं।
40 प्रतिशत तक सिमटा ऑनलाइन भुगतान
आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी रायपुर जैसे बड़े नगर निगम में भी केवल करीब 40 प्रतिशत लोग ही ऑनलाइन माध्यम से संपत्तिकर चुका रहे हैं। बाकी लोग मार्च के आखिरी दिनों में लंबी कतारों में लगकर ऑफलाइन भुगतान कर रहे हैं। (Online Property Tax Payment) के कई विकल्प होने के बावजूद यह आंकड़ा उम्मीद से काफी कम है।
तकनीकी अड़चन बनी सबसे बड़ी वजह
ऑनलाइन टैक्स भुगतान से दूरी की सबसे बड़ी वजह तकनीकी समस्याएं मानी जा रही हैं। कभी सर्वर स्लो हो जाता है, तो कभी भुगतान के बाद पावती अपडेट नहीं होती। कई मामलों में टैक्स कटने के बाद भी सिस्टम में बकाया दिखता रहता है, जिससे लोगों का भरोसा डगमगाता है।
रसीद का डर और भरोसे की कमी
संपत्तिकर की हार्ड कॉपी रसीद को लोग सालों तक संभालकर रखते आए हैं। डिजिटल पावती को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है। कई लोगों का कहना है कि मोबाइल या ईमेल से पावती गायब हो जाए तो भविष्य में परेशानी हो सकती है। यही कारण है कि (Online Property Tax Payment) होते हुए भी लोग काउंटर पर जाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
रायपुर-बिलासपुर का अलग-अलग अनुभव
रायपुर पहला नगर निगम था, जिसने अगस्त 2019 में प्रॉपर्टी टैक्स को पूरी तरह ऑनलाइन किया। यहां व्हाट्सएप चैटबॉट, यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गईं। इसके बावजूद लोग अंतिम समय में जोन दफ्तर पहुंच रहे हैं। वहीं बिलासपुर में ऑनलाइन भुगतान का प्रतिशत अभी भी 30 के आसपास ही सिमटा हुआ है।
पिछले साल का ट्रेंड क्या कहता है
बीते वर्ष करीब 95 हजार करदाताओं ने ऑनलाइन टैक्स जमा किया, जो कुल संख्या के मुकाबले कम माना जा रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम अब पहले से ज्यादा स्थिर है, लेकिन लोगों की मानसिकता बदलने में समय लगेगा। (Online Property Tax Payment) को लेकर भरोसा धीरे-धीरे ही बन रहा है।
जनता की उम्मीदें और सुझाव
करदाताओं का कहना है कि यदि डिजिटल रसीद को आसानी से डाउनलोड और दोबारा प्राप्त करने की सुविधा मिल जाए, तो ऑनलाइन भुगतान को अपनाने में हिचक कम होगी। बिजली बिल जैसे सिस्टम का उदाहरण देते हुए लोग चाहते हैं कि नगर निगम का प्लेटफॉर्म भी उतना ही भरोसेमंद बने।
डिजिटल इंडिया के दौर में संपत्तिकर जैसे जरूरी टैक्स का ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य दिशा है। लेकिन जब तक सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद और सरल नहीं बनेगा, तब तक (Online Property Tax Payment) सिर्फ विकल्प बनकर ही रह जाएगा, आदत नहीं।





