सीजी भास्कर, 3 जनवरी। राज्य में रसायन मुक्त एवं प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Natural Farming Mission) के तहत किए जा रहे प्रयासों से कृषकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उनकी आय में वृद्धि का अवसर मिल रहा है। इस दिशा में राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला के कृषक दंपती मनभौतिन बाई निषाद एवं माखन निषाद ने जैविक खेती (Organic Farming) अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Natural Farming Mission) के तहत वर्ष 2025 में राजनांदगांव विकासखंड के 150 हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर विकसित कर किसानों को जैविक एवं रसायन मुक्त खेती (Natural Farming, Organic Farming) के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी क्रम में ग्राम मोखला स्थित प्रगति महिला स्वसहायता समूह के कृषकों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क सहित अन्य प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण एवं फसल की अवस्था अनुसार उनके उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण से लाभ
68 वर्षीय मनभौतिन बाई और उनके 72 वर्षीय पति माखन निषाद ने 2.34 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती (Natural Farming) शुरू की। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता समाप्त कर जीवामृत, घनजीवामृत एवं नीमास्त्र जैसे उत्पादों का उपयोग किया। लागत कम होने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ने के कारण उत्पादकता में वृद्धि हुई।
कृषक दंपती ने बताया कि रासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20-22 हजार रुपये लागत आती थी, जबकि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) में घरेलू सामग्री से लागत कम और लाभ अधिक हुआ। देशी गाय का गोबर, गौमूत्र, मिट्टी और स्थानीय पत्तियों के उपयोग से लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ी।
आर्थिक स्थिति सुदृढ़
प्राकृतिक खेती (Natural Farming, Organic Farming) से उपज की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने लगा। व्यापारी सीधे खेत से उपज खरीद रहे हैं। वर्ष 2025-26 में कृषक दंपती ने सब्जियों के साथ तिवड़ा, मसूर और सरसों की खेती प्राकृतिक पद्धति से की। क्रांतिकारी प्रयासों और प्रशिक्षण के माध्यम से प्राकृतिक खेती (Natural Farming) राज्य में तेजी से फैल रही है और किसानों के जीवन स्तर में सुधार ला रही है।


