सीजी भास्कर, 19 फरवरी। Oxygen Plant Safety Bhilai : भिलाई के कांट्रेक्टर कॉलोनी, रामनगर स्थित स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के बेसमेंट में संचालित ऑक्सीजन प्लांट और मैनीफोल्ड रूम को लेकर पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO Action) ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने जिला दंडाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर मौके की वस्तुस्थिति, दस्तावेज़ों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

बेसमेंट में प्लांट संचालन पर उठे नियमगत सवाल : Oxygen Plant Safety Bhilai
शिकायतों और शुरुआती इनपुट्स में संकेत मिले हैं कि बेसमेंट जैसे बंद परिसर में ऑक्सीजन प्लांट का संचालन (Hospital Safety Compliance) के तय मानकों से मेल नहीं खा सकता। गैस सिलेंडर नियम, 2016 के प्रावधानों और SMPV (U) नियमों के अनुरूप लाइसेंसिंग, सेफ्टी-डिस्टेंस और वेंटिलेशन की शर्तों की वास्तविक स्थिति अब जांच का केंद्र होगी।

स्कूल-आंगनबाड़ी नज़दीक, जोखिम कई गुना बढ़ा
हॉस्पिटल परिसर के ठीक बगल में शासकीय स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन बताया जा रहा है। बेसमेंट में ऑक्सीजन प्लांट और मैनीफोल्ड रूम का होना लीकेज या विस्फोट जैसी आपात स्थितियों में मरीजों के साथ-साथ आसपास मौजूद बच्चों और स्थानीय निवासियों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है—यह पहलू (Safety Audit) में विशेष रूप से परखा जाएगा।

दस्तावेज़ी मंज़ूरी और NOC की पड़ताल
प्रशासनिक टीम यह सत्यापित करेगी कि क्या प्लांट संचालन के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और वैध लाइसेंस मौजूद हैं। साथ ही, ‘टेबल-6’ के अनुसार अनिवार्य सुरक्षा दूरी, फायर-सेफ्टी इंतज़ाम और आपात निकासी प्रोटोकॉल का पालन हुआ है या नहीं—इन बिंदुओं पर (Gas Cylinder Rules) के तहत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

मौके पर भौतिक सत्यापन, सेफ्टी-डिस्टेंस पर फोकस
जांच के दौरान प्लांट की लोकेशन, सिलेंडर स्टोरेज, मैनीफोल्ड रूम की बनावट, वेंटिलेशन और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। यदि सेफ्टी-डिस्टेंस या लाइसेंस शर्तों में कमी पाई गई, तो नियमानुसार सुधारात्मक निर्देश या कार्रवाई संभव है।

प्रशासन का संदेश—जनसुरक्षा से समझौता नहीं
अधिकारियों का कहना है कि PESO के निर्देशों के अनुरूप किसी भी स्तर पर जनसुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, ताकि अस्पतालों में जीवनरक्षक सुविधाओं के संचालन में सुरक्षा मानकों की कड़ाई से अनुपालना सुनिश्चित की जा सके।

आपको बता दें कि हाल ही में जयपुर आक्सीजन सिलेंडर में हुए ब्लास्ट की घटना के बाद रिहायशी इलाके में संचालित Sparsh Multispecialty Hospital में आक्सीजन प्लांट के संचालन से जनहानि के खतरे को लेकर कांट्रेक्टर कालोनी के रहवासियों ने 3 फरवरी 2026 को आपातकालीन सामूहिक हस्ताक्षरित शिकायत जिला कलेक्टर दुर्ग से की थी। इस पत्र में स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रख कर चलाए जा रहे आक्सीजन प्लांट से उत्पन्न आसन्न खतरे की ओर शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया था।
शिकायत में विस्फोट के गंभीर खतरे की ओर ध्यानाकर्षण
अस्पताल प्रबंधन ने घनी आबादी वाले मोहल्ले के बीचों-बीच अत्यंत असुरक्षित तरीके से ऑक्सीजन प्लांट लगा रखा है। यहाँ सैकड़ों की संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर और ज्वलनशील गैसों का भंडारण बेसमेंट में मैनिफोल्ड रूम में किया जाता है। अस्पताल के पास इस प्लांट के संचालन हेतु आवश्यक PESO (Explosives Dept) और फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। किसी भी छोटी दुर्घटना या तकनीकी खराबी की स्थिति में यहाँ भीषण विस्फोट हो सकता है, जिससे पूरे मोहल्ले का अस्तित्व खतरे में है।

आक्सीजन प्लांट की मशीनों से 24 घंटे होने वाला शोर (Noise Pollution) असहनीय स्तर पर पहुंच चुका है। इससे मोहल्ले के बीमार व्यक्तियों, बुजुर्गों और पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर अत्यंत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि कई बार मौखिक शिकायत के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शोर कम करने का कोई प्रयास नहीं किया है बल्कि जब भी हम हॉस्पिटल प्रबंधन से शिकायत करने जाते है हॉस्पिटल के बाउंसर और गार्ड हमें प्रबंधन से मिलने नहीं देते और हकाल देते हैं।

कालोनीवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा इस प्लांट की सुरक्षा एवं फायर ऑडिट तत्काल कराई जाए। रिहाइशी इलाके के बीचों-बीच स्थित इस ‘टाइम बम’ नुमा प्लांट को यहाँ से हटाकर किसी सुरक्षित स्थान स्थानांतरित किया जाए। जांच पूरी होने तक इस अवैध प्लांट के संचालन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसके बाद PESO के निर्देश बाद शासन प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, यह कुछ दिनों में सामने आएगा।







