सीजी भास्कर, 24 जनवरी। तारीखें तय हैं, बयान दिए जा चुके हैं, लेकिन खेतों में खड़ा धान अब भी जवाब मांग रहा है। सरकारी कैलेंडर और किसानों की मजबूरी के बीच पैदा हुआ यह तनाव अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, सियासी शक्ल लेता दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय-सीमा को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान (Paddy Procurement Chhattisgarh) कर दिया है। पार्टी ने 29 जनवरी को पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करने का निर्णय लेते हुए धान खरीदी की अंतिम तिथि 28 फरवरी तक बढ़ाने की मांग रखी है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि मौजूदा हालात में हजारों किसान अब भी अपनी फसल बेचने से वंचित हैं।
पार्टी का आरोप है कि सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की घोषणा तो की, लेकिन कई जिलों में केंद्र समय पर नहीं खुले। कहीं 17 और 18 नवंबर से खरीदी शुरू हुई, तो कुछ स्थानों पर 25 नवंबर के बाद प्रक्रिया चालू हो सकी। इसके बावजूद खरीदी 29 जनवरी को बंद करने का फैसला किसानों के साथ अन्याय है, खासकर तब जब पहले 31 जनवरी तक खरीदी जारी रखने का भरोसा दिया गया था।
आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि रकबा सत्यापन के नाम पर छोटे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना (Paddy Procurement Chhattisgarh) पड़ा है। कई किसानों का रकबा शून्य कर दिया गया, जबकि अनेक ऐसे किसान हैं जिन्हें न ऑनलाइन टोकन मिल पाया और न ही ऑफलाइन व्यवस्था से राहत मिली। पार्टी का दावा है कि अब तक लगभग 20 प्रतिशत किसान अपनी धान नहीं बेच सके हैं।
प्रदेश संगठन मंत्री तेजेंद्र तोड़ेकर ने कहा कि जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है, उनके सामने अब कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है। धान नहीं बिकेगा तो परिवार (Paddy Procurement Chhattisgarh) कैसे चलेगा और बैंकों का पैसा कैसे लौटेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। उन्होंने सहकारी समितियों में अनियमितताओं और धान भंडारण में लापरवाही के आरोप भी लगाए।
वहीं, पार्टी के अन्य नेताओं ने धमतरी और महासमुंद जैसे जिलों के उदाहरण देते हुए कहा कि टोकन और पट्टा होने के बावजूद धान जब्ती की कार्रवाई की गई, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि रकबा समर्पण और भौतिक सत्यापन के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को रोका जाए और धान खरीदी की समय-सीमा 28 फरवरी तक बढ़ाई जाए।


