धान खरीदी में हो रही देरी और तय सीमा को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। (Paddy Procurement Protest) के तहत किसानों के साथ कांग्रेस नेताओं ने कंधों पर धान की बोरियां लादकर कलेक्टोरेट तक मार्च किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक था, लेकिन संदेश साफ था—खरीदी समय पर नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा।
तय लिमिट बनी किसानों की सबसे बड़ी परेशानी
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए समितियों में प्रतिदिन की लिमिट तय कर दी गई है। (Rice Procurement Issue) की वजह से प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है, जबकि अंतिम तिथि नजदीक आने से किसानों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
टोकन के बाद भी नहीं बिक पा रहा धान
किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई समितियों में टोकन कटने के बावजूद तय दिन पर धान नहीं लिया जा रहा। (Farmers Protest Chhattisgarh) के दौरान बताया गया कि जैसे ही दैनिक सीमा पूरी होती है, कंप्यूटर सिस्टम नई एंट्री रोक देता है, जिससे किसान रोज़मर्रा का काम छोड़कर समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
आंकड़े बता रहे खरीदी की हकीकत
खरीदी केंद्रों से मिले आंकड़ों के मुताबिक कई समितियों में लक्ष्य के मुकाबले आधे से भी कम धान की खरीदी हुई है। (MSP Paddy Purchase) को लेकर किसानों का कहना है कि यह सीधा अन्याय है और दैनिक लिमिट बढ़ाए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है।
चेतावनी के साथ सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने साफ कहा कि छोटे और बड़े—दोनों वर्ग इस परेशानी से जूझ रहे हैं। यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक होगा। चेतावनी दी गई कि मजबूरी में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के घरों तक धान पहुंचाने की स्थिति बनी, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।


