सीजी भास्कर, 11 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया संवाद कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा (Pariksha Pe Charcha 2026) इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। स्कूली छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ होने वाले इस कार्यक्रम में भागीदारी ने पिछले वर्ष के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। अब तक चार करोड़ से अधिक लोग (Pariksha Pe Charcha 2026) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम अब केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव मुक्त परीक्षा वातावरण के लिए एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि (Pariksha Pe Charcha 2026) के माध्यम से देशभर के विद्यार्थी परीक्षा से जुड़े भय और दबाव से बाहर निकलने की दिशा में प्रेरित हो रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में परीक्षा पे चर्चा (Pariksha Pe Charcha 2026) ने छात्रों को आत्मविश्वास, एकाग्रता और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा की तैयारी करने का नया दृष्टिकोण दिया है। जैसे-जैसे बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, यह संवाद कार्यक्रम छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
शिक्षा मंत्री ने देशभर के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों से (Pariksha Pe Charcha 2026) में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए जाने वाले अनुभव और सुझाव न केवल परीक्षा तनाव को कम करते हैं, बल्कि जीवन में संतुलन और अनुशासन का महत्व भी समझाते हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की इस पहल के तहत 8 जनवरी 2026 तक परीक्षा पे चर्चा 2026 (Pariksha Pe Charcha 2026) के लिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के चार करोड़ से अधिक पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पिछले वर्ष 3.56 करोड़ पंजीकरण के साथ बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड इस बार पहले ही पार कर लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि (Pariksha Pe Charcha 2026) की बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि देश के छात्र परीक्षा को लेकर सकारात्मक सोच अपनाने लगे हैं। यह कार्यक्रम न केवल परीक्षा की तैयारी में मदद करता है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


