Pension Fraud Racket Exposed दुर्ग जिले में सामने आए एक संगठित फर्जीवाड़े ने सिस्टम की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया। 15 रिटायर्ड कर्मचारियों को काग़ज़ों में “मृत” बताकर पेंशन/बीमा दावों के ज़रिए कुल 1.19 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। पूरा खेल 5% कमीशन पर “सेटिंग” के भरोसे खड़ा किया गया था, जिसमें ऑनलाइन सेवा केंद्र की भूमिका केंद्रीय रही।
Fake Death Certificate Scam से बना पैसा निकालने का रास्ता
(Fake Death Certificate Scam) में फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र और केवाईसी दस्तावेज तैयार कर दावे फाइल किए गए। सत्यापन की औपचारिकताओं को दरकिनार कर बैंकिंग चैनलों से रकम निकाली गई। जांच के दौरान कई दस्तावेज़ों में समान पते, संदिग्ध क्यूआर कोड और पैटर्न-मैचिंग जैसी गड़बड़ियाँ सामने आईं, जिससे फर्जीवाड़े की कड़ी जुड़ती चली गई।
NPS Claim Abuse ने नियमों को किया दरकिनार
(NPS Claim Abuse) के तहत योजना की शर्तों का गलत इस्तेमाल किया गया। जीवित खाताधारक सामान्य तौर पर आंशिक राशि ही निकाल सकते हैं, जबकि मृत्यु के बाद ही पूरी रकम नामांकित व्यक्ति को मिलती है। आरोप है कि जीवित लोगों को मृत दर्शाकर 100% निकासी की गई—यानी नियमों का खुला उल्लंघन।
Digital Evidence Trail से मास्टरमाइंड तक पहुँची पुलिस
(Digital Evidence Trail) की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, अपलोड करवाने और दावे आगे बढ़ाने का तरीका सामने आया। साथ ही, एक बीमा कंपनी के पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी उजागर हुई है, जिसकी तलाश जारी है। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, कैश रिकवरी और दस्तावेज़ी साक्ष्यों को जब्त कर आगे की कार्रवाई तेज़ कर दी गई है।
सतर्कता ही सुरक्षा
(Public Advisory on Pension Safety) के तौर पर जांच एजेंसियों ने साफ संदेश दिया है—नौकरी/पेंशन/बीमा दावों में “दलाल-कल्चर” से दूर रहें, किसी अनजान के कहने पर दस्तावेज साझा न करें, और संदिग्ध ऑफ़र दिखें तो तुरंत सूचना दें। सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दावों के क्रॉस-वेरिफिकेशन और डिजिटल ऑडिट को और मज़बूत किया जा रहा है।






