PM Janman Housing Scam : सरगुजा जिले के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाए जा रहे आवासों को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। करीब दो लाख रुपये की लागत से बने इन घरों में न तो तय मानकों के अनुसार कॉलम लगाए गए और न ही मजबूत नींव पर काम हुआ, इसके बावजूद छत डाल दी गई।
कागजों में पूरा, ज़मीन पर खोखला निर्माण
निर्माण की गंभीर खामियों के बावजूद विभागीय रिपोर्ट में सब कुछ “संतोषजनक” दर्शाकर भुगतान कर दिया गया। दो कमरों वाले इन मकानों में ठेकेदार की मनमानी साफ झलकती है, वहीं निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे इंजीनियर और ग्राम सचिव की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मैनपाट में सटाकर बनाए गए तीन मकान
मैनपाट क्षेत्र की पिडिया ग्राम पंचायत के घोराघाट इलाके में 30 मीटर के दायरे में तीन मकान एक-दूसरे से सटाकर खड़े कर दिए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने दो घरों के बीच तीसरा मकान केवल इसलिए बना दिया, ताकि दोनों ओर की दीवारें न बनानी पड़ें और खर्च कम हो जाए।
न कॉलम, न तय सरिया, फिर भी छत तैयार
इन आवासों में न तो मानक के अनुसार कॉलम लगाए गए और न ही तय मोटाई की सरिया का उपयोग किया गया। हैरानी की बात यह है कि निर्माण के दौरान निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारियों को भी कोई खामी नजर नहीं आई, जबकि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
ठेकेदार ने झाड़ा पल्ला
मामले में ठेकेदार का कहना है कि उन्हें निर्माण नियमों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनके मुताबिक, हर जगह 8 एमएम सरिया का ही उपयोग हो रहा है और 12 एमएम सरिया लगाने का कोई निर्देश उन्हें नहीं मिला। जैसे बाकी इलाकों में काम हुआ, वैसा ही यहां भी किया गया।
योजना की मंशा पर सवाल
पीएम जनमन योजना के तहत जिले में कुल 2565 मकान स्वीकृत हैं, जिनमें से 1260 मकानों को पूरा बताया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत सामने आने के बाद योजना की गुणवत्ता, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पहाड़ी कोरवाओं के लिए सुरक्षित आवास का सपना कहीं कागजों तक ही सीमित न रह जाए।


