सीजी भास्कर, 1 नवंबर | PM Modi inaugurates Shanti Shikhar : नवा रायपुर के सेक्टर-20 में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रह्माकुमारी संस्था के भव्य शांति शिखर रिट्रीट सेंटर (Academy for a Peaceful World) का उद्घाटन किया। लगभग 1.5 एकड़ में फैले इस ध्यान केंद्र के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, “जब सेवा भाव, आध्यात्म और शांति का संगम होता है, तब भारत का वास्तविक स्वरूप सामने आता है।”
राज्यों के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड के नागरिकों को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज तीनों राज्य अपनी विकास यात्रा के 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “राज्यों का विकास ही देश के विकास की नींव है। हम सब मिलकर भारत को Developed Nation बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
PM Modi inaugurates Shanti Shikhar : ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ दशकों पुराना जुड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ अपने लंबे संबंधों को याद करते हुए कहा कि उनका इस संस्था से जुड़ाव दशकों पुराना है।
उन्होंने कहा, “मैंने इस संगठन को एक वटवृक्ष की तरह बढ़ते हुए देखा है। 2011 में अहमदाबाद के ‘Future of Power’ कार्यक्रम से लेकर 2012 में संस्था के 75 वर्ष के उत्सव तक, हर पड़ाव मेरी यादों का हिस्सा है।”
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली आने के बाद भी उन्हें कई बार संस्था के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला, चाहे वह Azadi Ka Amrit Mahotsav हो या Swachhata Abhiyan।
सेवा और साधना ही असली शक्ति
प्रधानमंत्री ने अपने भावनात्मक संबोधन में कहा, “यहां शब्द कम हैं, सेवा अधिक है। यही इस संस्था की ताकत है।”
उन्होंने बताया कि जब भी वे ब्रह्माकुमारी परिवार के बीच आए हैं, उन्होंने निस्वार्थ सेवा और अनुशासन का भाव महसूस किया है।
मोदी ने कहा, “हमारे देश की परंपरा कहती है — आचरण ही सबसे बड़ा धर्म है। कथन और कर्म में एकता ही सच्चा परिवर्तन लाती है।”
उन्होंने ‘Om Shanti’ के अर्थ को समझाते हुए कहा, “ओम का अर्थ है ब्रह्म, जबकि शांति का अर्थ है स्थिरता और सद्भाव।”
अपनापन और आध्यात्मिक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं यहां अतिथि नहीं, आपका ही एक सदस्य हूं।”
उन्होंने ब्रह्माकुमारी परिवार की वरिष्ठ साधिकाओं — जानकी दीदी और राजयोगिनी दादी योगिनी जी — के प्रति विशेष स्नेह और आभार व्यक्त किया।
मोदी ने कहा कि उनका स्नेह और मार्गदर्शन मेरे जीवन की अमूल्य स्मृतियां हैं।
प्रधानमंत्री ने दिया ‘शांति का संदेश’
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को ‘ओम शांति’ का भाव समझने और जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि आज के युग में स्थिरता, करुणा और सहयोग की भावना ही मानवता को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है।
“हम भारत को सिर्फ विकसित नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध बनाना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।





